पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्य सचिव और ममता बनर्जी की खास नंदिनी चक्रवर्ती को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने महत्वपूर्ण और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. नंदिनी चक्रवर्ती को सुवेंदु सरकार में बीएसएफ की बाड़बंदी के लिए सीमावर्ती भूमि हस्तांतरण की देखरेख करने और केंद्र प्रायोजित परियोजनाओं की निगरानी करने की भूमिका सौंपी गई है.
बता दें कि विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव आयोग द्वारा विवादास्पद रूप से उन्हें पद से हटाए जाने के बाद यह बड़ी जिम्मेदारी उन्हें दी गई है.
नंदिनी चक्रवर्ती को मिली खास जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को जब राज्य विधानसभा की तिथि की घोषणा हुई थी उस समय भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा उनके पद से हटा दिया गया था. उन्हें आमतौर पर ममता बनर्जी का खास माना जाता था, इसलिए सुवेंदु अधिकारी की सरकार में उन्हें जिम्मेदारी मिलना चर्चा का विषय बना हुआ है.
इसके अलावा नबन्ना स्थित मौजूदा राज्य सचिवालय के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि नंदिनी चक्रवर्ती को उनके वर्तमान पद “विकास कार्यों के प्रधान समन्वयक” के रूप में भी बरकरार रखा गया है. बता दें कि नंदिनी का पद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के सीधे अधीन एक पद है, लेकिन उनके कार्य विशिष्ट और अलग हैं. जानकारी के अनुसार “विकास कार्यों के प्रधान समन्वयक” के रूप में, चक्रवर्ती का पहला कार्य राज्य में बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार तार की बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करना है.
कौन हैं नंदिनी चक्रवर्ती
नंदिनी चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल कैडर की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाती हैं. चक्रवर्ती मुख्य सचिव बनने वाली राज्य की पहली महिला हैं. नंदिनी चक्रवर्ती ने कोलकाता के प्रतिष्ठित लेडी ब्राबोर्न कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है. इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारी के रूप में चक्रवर्ती ने राज्य सरकार में राज्य गृह सचिव, राज्य सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के सचिव और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है.
इस साल जनवरी में राज्य सचिव के पद पर उनकी पदोन्नति विवादों से घिरी हुई थी क्योंकि यह कई अन्य आईएएस अधिकारियों की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए की गई थी।