पश्चिम बंगाल में सियासी तनातनी का माहौल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी को अब नई शुभेंदु सरकार ने एक और झटका दे दिया है.
जानकारी के अनुसार, नवनिर्वाचित सरकार में राज्य के पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष ने घोषणा की है कि सरकारी सहायता प्राप्त पुस्तकालयों से ‘एपांग ओपांग झपांग’ हटाई जाएगी. उनके इस फैसले के साथ ही पश्चिम बंगाल में लाइब्रेरी में रखी जाने वाली किताबों को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है.
क्या है एपांग ओपांग झपांग?
गौरीशंकर घोष की ‘एपांग ओपांग झपांग’ का आशय पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की किताबों से है, जिसे राज्यभर के सभी पुस्तकालयों में रखा गया है.
पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष का कहना है, “पुस्तकालय ज्ञान पाने की जगह हैं, इसलिए वहां ऐसी ही किताबें होनी चाहिए जो बच्चों के बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय चेतना में सहायक हों.” उन्होंने कहा कि ‘एपांग ओपांग झपांग’ जैसी ‘अर्थहीन कविताओं’ (नॉनसेंस पोएम) से राज्य की लाइब्रेरी में जगह बर्बाद नहीं की जाएगी, क्योंकि इन किताबों से पाठकों के व्यक्तित्व विकास में कोई विशेष योगदान नहीं मिलता है.
‘एपांग ओपांग झपांग’ विवाद से ममता दीदी की किताबों का कनेक्शन
दरअसल, ‘एपांग ओपांग झपांग’ मूल रूप से बच्चों के लिए बनी एक एनर्जी ड्रिंक के विज्ञापन का जिंगल था, जिसका बंगला भाषा में कोई स्पष्ट अर्थ नहीं है. ममता बनर्जी ने अपनी कविता में भी इन शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद से ही विपक्षी दल (विशेषकर बीजेपी) उन पर तंज कसते रहे हैं. साल 2022 में पं बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके काव्य संग्रह ‘कविता बितान’ के लिए बांग्ला एकेडमी अवॉर्ड भी मिला था. उस वक्त भी इस कविता को लेकर साहित्यिक और राजनीतिक बहस छिड़ी थी. साहित्यिक भाषा में कहा जाए तो इस तरह की कविता को ‘बकवास कविता’ या ‘बिना मतलब की कविता’ कहा जाता है.
राज्य की सभी सरकारी लाइब्रेरी से हटेंगी किताबें
घोष ने साफ लहजे में कहा, ‘राज्य की सभी लाइब्रेरी से एपांग ओपांग झपांग हटा दी जाएंगी.’ जब उनसे ये पूछा गया कि क्या ममता बनर्जी की लिखी कोई किताब लाइब्रेरी में नहीं होंगी? तो उन्होंने कहा, ‘मैं उन सभी टेक्स्टबुक को रखकर जगह बर्बाद नहीं करूंगा, जिन्हें पढ़ने से बच्चे का दिमाग विकसित नहीं होता. उनकी जगह पुस्तकालयों में रवींद्रनाथ, नजरुल इस्लाम और विवेकानंद की किताबें होंगी. शिवाजी और राणा प्रताप की जीवनियां होंगी.’