Home > देश > TMC में बगावत या जालसाजी? ममता दीदी ने दो विधायकों को दिखाया बाहर का रास्ता; फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने मचाई हलचल

TMC में बगावत या जालसाजी? ममता दीदी ने दो विधायकों को दिखाया बाहर का रास्ता; फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने मचाई हलचल

TMC MLA Expelled: ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के संबंध में एक बड़ा कदम उठाया है. TMC ने दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया है.

By: Shristi S | Published: June 1, 2026 3:45:26 PM IST



TMC Fake Signature Case: पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के संबंध में एक बड़ा कदम उठाया है. TMC ने दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया है. यह कार्रवाई मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस खुलासे के कुछ ही मिनटों बाद की गई कि इन दोनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने विपक्ष के नेता के नाम का प्रस्ताव करने वाले पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.

उनकी लिखावट मेल नहीं खा रही थी. इसी आधार पर हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की गई. इसके बाद, CID ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली. इसी मामले के संबंध में, CID ने पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी को भी समन जारी किया है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि फर्जी विवाद मामला क्या है और इस पर निष्कासित संदीपन साहा ने क्या कहा.

‘फर्जी हस्ताक्षर’ विवाद क्या है?

यह गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के महासचिव के तौर पर विधानसभा सचिवालय को एक पत्र भेजा. इस प्रस्ताव में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नैना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उप-नेता, और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक बनाया गया था.

इसके बाद, स्पीकर रथिंद्र बोस ने TMC विधायकों से इस प्रस्ताव के समर्थन में हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया. जब कुछ हस्ताक्षरों में स्पष्ट विसंगतियां पाई गईं, तो यह मामला CID को सौंप दिया गया. जांच में तेज़ी लाते हुए, CID ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसका नेतृत्व DIG रैंक का एक अधिकारी कर रहा है. इस टीम में एक DSP और दो इंस्पेक्टर भी शामिल हैं.

13 में से 3 हस्ताक्षर नकली 

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी इस हस्ताक्षर घोटाले के संबंध में TMC पर तीखा हमला बोला है. राज्य सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि 13 TMC विधायकों में से तीन ने खुद यह स्वीकार किया है कि उन्होंने संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.

उन दो TMC विधायकों का हवाला देते हुए, जिन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ जालसाज़ी की शिकायत दर्ज कराई थी, मुख्यमंत्री ने कहा कि TMC पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है, और इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए ही जांच CID को सौंपी गई थी.

संदीपन साहा ने पार्टी नेतृत्व पर साधा निशाना

सोमवार दोपहर को अपने निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए, संदीपन साहा ने इसे एक गंभीर गलती करार दिया. उन्होंने कहा कि उन विधायकों के हस्ताक्षर जमा करना, जो उस जगह पर शारीरिक रूप से मौजूद भी नहीं थे, एक गंभीर भूल थी. साहा ने स्पष्ट किया कि विधायकों की जिस सूची पर हस्ताक्षर थे, उसमें कई विसंगतियां थीं. चूंकि अभिषेक बनर्जी ने राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर उस सूची पर हस्ताक्षर किए थे, इसलिए यह स्वाभाविक ही है कि उनके आचरण को लेकर सवाल उठेंगे. यह अभिषेक बनर्जी की जिम्मेदारी थी, और वे इसे निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं.

पार्टी के वरिष्ठ सांसदों अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हाल ही में हुए हमलों पर साहा ने टिप्पणी की कि जहां एक समय दक्षिण कोलकाता में हर जगह अभिषेक बनर्जी के समर्थक दिखाई देते थे, वहीं अब वे अचानक क्यों गायब हो गए हैं, इसका जवाब केवल वे खुद ही दे सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि डायमंड हार्बर मॉडल लागू होने के बावजूद, अब जनता का गुस्सा साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है. पंचायत और नगरपालिका स्तर पर सामने आ रही घटनाओं ने उन पार्टी नेताओं को भी मुश्किल में डाल दिया है, जिनका इन विवादों से कोई लेना-देना नहीं है. ठीक इसी कारण से, आत्म-सम्मान रखने वाले नेता फिलहाल पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज से दूरी बना रहे हैं.

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