Suvendu Adhikari Selected Bhabanipur Seat: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटें जीती थीं, जिसके बाद उन्हें एक सीट खाली करनी थी. उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी है और भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में अपना काम जारी रखेंगे. उन्होंने विधानसभा में भवानीपुर के विधायक के तौर पर शपथ ली है.
यह बात ध्यान देने लायक है कि उन्होंने इसी सीट पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था. दोनों सीटें जीतने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि मैं 10 दिनों के अंदर एक सीट खाली कर दूंगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी ही इस बारे में आखिरी फैसला लेगी कि वह कौन सी सीट अपने पास रखेंगे. मेरी अपनी राय तो जरूर होगी, जिसे मैं पार्टी के बड़े नेताओं के सामने रखूंगा.
सुवेंदु ने नंदीग्राम सीट कितने वोटों के अंतर से जीती?
सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र में TMC के पवित्र कर को हराया. BJP उम्मीदवार अधिकारी को इस सीट पर 127,301 वोट मिले, जबकि TMC उम्मीदवार पवित्र कर को 117,636 वोट मिले. वहीं, CPI के शांति गोपाल गिरी तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें लगभग 3,000 वोट मिले. कांग्रेस उम्मीदवार शेख जरितुल हुसैन पांचवें स्थान पर रहे और उन्हें सिर्फ 794 वोट मिले.
सुवेंदु को भवानीपुर में कितने वोट मिले?
2021 के चुनावों में, BJP के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था. हालांकि उनकी पार्टी को राज्य में बहुमत मिल गया था, लेकिन ममता बनर्जी खुद चुनाव हार गई थीं; नतीजतन, भवानीपुर सीट खाली हो गई थी, और बाद में ममता बनर्जी ने वहां उपचुनाव जीतकर विधायक का पद संभाला था. 2026 में, सुवेंदु अधिकारी ने एक बार फिर चुनावों में ममता बनर्जी को करारी शिकस्त दी. इस मुकाबले में, सुवेंदु को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले. सुवेंदु ने भवानीपुर में ममता को 15,105 वोटों के अंतर से हराया.
नंदीग्राम सीट कितनी महत्वपूर्ण है?
पश्चिम बंगाल में, नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र को लंबे समय से ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता रहा है; हालांकि, पिछले चुनाव में अपनी हार के बाद, ममता ने इस सीट की ओर मुड़कर नहीं देखा है. सुवेंदु अधिकारी भी इस सीट को अपना गढ़ मानते हैं. यह उनके राजनीतिक करियर का मुख्य केंद्र रहा है. वर्ष 2007 में, उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानूनों के विरुद्ध चले आंदोलन का नेतृत्व किया था.