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सोनम वांगचुक का ‘मिट्टी वाला’ घर, पैसिव सोलर तकनीक गर्मी में सर्दी और सर्दी में गर्मी का देते हैं एहसास

Sonam Wangchuk Home: सोनम वांगचुक ने लद्दाख में मिट्टी वाला घर बनाया है. जिसमें पैसिव सोलर तकनीक का इस्तेमाल किया है. जिसकी वजह से सर्दी में गर्मी और गर्मी में सर्दी का एहसास होता है.

By: Sohail Rahman | Last Updated: July 28, 2026 4:00:15 PM IST



Sonam Wangchuk Tribal House: इंजीनियर, शिक्षक और इनोवेटर सोनम वांगचुक, जो सीजेपी के नेतृत्व वाले छात्र विरोध प्रदर्शन में एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे थे, हफ्तों के इलाज के बाद मेदांता अस्पताल से रिहा कर दिए गए हैं. अस्पताल से छुट्टी मिलने के तुरंत बाद एक वीडियो में उन्होंने बताया कि वे लद्दाख स्थित अपने घर लौटने से पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाएंगे, ताकि देश भर में शिक्षा सुधारों और छात्रों के अधिकारों के लिए अपनी वकालत जारी रख सकें.

उन्हें अस्पताल में तब भर्ती कराया गया था जब उन्होंने CJP विरोध प्रदर्शन के तहत 26 दिनों की भूख हड़ताल की थी. इस विरोध का मकसद व्यापक परीक्षा सुधारों की मांग करना और पेपर लीक विवादों की एक श्रृंखला के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना था.

सोनम वांगचुक का मिट्टी वाला घर

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, लगभग तीन साल पहले वांगचुक ने ‘ट्राइबल गर्ल’ के साथ एक वीडियो में दर्शकों को लद्दाख में बने अपने टिकाऊ घर की सैर कराई थी. कंक्रीट से पूरी तरह मुक्त यह घर मिट्टी से बना है, जिसमें सदियों पुराने पारंपरिक निर्माण तरीकों को आधुनिक इंटीरियर और पर्यावरण के अनुकूल डिज़ाइन के साथ मिलाया गया है. वांगचुक इसे अपना ‘आदिवासी घर’ कहना पसंद करते हैं, क्योंकि इसे बनाने में इस्तेमाल की गई सामग्री से ही उन्हें यह प्रेरणा मिली है.

उन्होंने कहा कि हम अक्सर घर बनाने के पारंपरिक तरीकों को छोड़ देते हैं. मिट्टी के घरों के बारे में तो अब शायद ही कोई सुनता है. हालांकि, मैंने दोनों दुनिया की बेहतरीन चीजों को अपनाया है. मैंने अतीत की अच्छी बातों को अपनाया है और आज की तकनीक के साथ उन्हें और बेहतर बनाया है.

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पैसिव सोलर तकनीक का करते हैं इस्तेमाल

घर के अंदर आधुनिक फर्नीचर होने के बावजूद, इंटीरियर लद्दाखी परंपरा से पूरी तरह जुड़ा हुआ है. इसके बारे में उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी कम ऊंचाई वाली बैठने की जगहें हैं, जो हमारी परंपरा से जुड़ी हैं. आमतौर पर लद्दाख में लोग इसी तरह बैठना पसंद करते हैं. मिट्टी की दीवारें एक व्यावहारिक काम भी करती हैं, जो गर्मियों के महीनों में घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखती हैं. सर्दियों में लकड़ी जलाने पर निर्भर रहने के बजाय, वांगचुक गर्मी के लिए पैसिव सोलर तकनीक का इस्तेमाल करते हैं.

उन्होंने बताया कि कैसे एक खास दीवार ‘ब्लैक वॉल’ में पानी की बोतलें लगी हैं, जो दिन भर सर्दियों की धूप से गर्मी सोखती हैं और सूरज ढलने के बाद धीरे-धीरे वह गर्मी घर में छोड़ती हैं. जैसा कि उन्होंने कहा कि भले ही दीवारें, खिड़कियां और कांच मॉडर्न हैं, लेकिन इस्तेमाल की गई टेक्नोलॉजी पारंपरिक है.

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