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तृणमूल कांग्रेस के भीतर इन दिनों भारी फूट देखने को मिल रही है. ममता बनर्जी के कई सिपाही टीएमसी छोड़ रहे हैं. सबसे बड़ी खबर अब सामने आई है कि ममता दीदी की सबसे भरोसेमंद और कद्दावर नेताओं में शुमार सयानी घोष ने भी एनडीए को समर्थन देने का मन बना लिया है. यानी कि टीएमसी के 20 बागी सांसदों की लिस्ट में वो भी शामिल हो गई हैं. इस खबर ने टीएमसी के समर्थकों से लेकर ममता बनर्जी की नींद उड़ा दी है.
सयानी घोष ने किए हस्ताक्षर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सयानी घोष ने काकोली घोष दस्तीदार से संपर्क किया और अलग हुए गुट को अपना समर्थन दिया. साथ ही गुट का समर्थन करने वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए. जानकारी के मुताबिक सयानी घोष का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस में अब उनका कोई राजनीतिक भविष्य नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक उनके कुछ करीबी सूत्रों ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हुए हमलों के समय पार्टी नेतृत्व से समर्थन न मिलना उनकी प्रमुख शिकायतों में से एक थी.
भाजपा पर जमकर साधा था निशाना
कई लोग सयानी घोष को टीएमसी के उत्तराधिकारी के रूप में भी देखने लगे थे. सयानी घोष अक्सर अपने भाषणों से चुनावी प्रचार के दौरान विवादों में रही थीं. भाजपा नेताओं ने भी उनका खूब विरोध किया था. ‘मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीना’ इस गाने को गाकर वह भाजपा नेताओं की आंखों की किरकिरी बन गई थीं. लेकिन अब वही सयानी घोष एनडीए में शामिल हो रही हैं.
सयानी घोष का राजनीतिक करियर
सयानी घोष ने एक्टिंग की दुनिया को छोड़ा राजनीति में कदम रखा. उन्होंने 24 फरवरी 2021 को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जॉइन की थी. उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में आसनसोल दक्षिण सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित होकर ममता बनर्जी ने उन्हें जून 2021 में टीएमसी युवा विंग का अध्यक्ष बना दिया. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने जादवपुर सीट से जीत हासिल कर सांसद के रूप में संसद पहुंचीं.