Raja Raghuvanshi Murder Case: देशभर में चर्चा का विषय बने राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा मोड़ आ गया है. शिलॉन्ग की अदालत ने करीब 11 महीने बाद इस केस की मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी है. कोर्ट के इस फैसले ने जहां एक ओर केस को फिर सुर्खियों में ला दिया है, वहीं पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जमानत के साथ सख्त शर्तें
अदालत ने सोनम को जमानत देते हुए कई कड़ी शर्तें लगाई हैं. उसे गवाहों और सबूतों से दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया गया है. साथ ही बिना अनुमति शिलॉन्ग छोड़ने पर भी रोक लगाई गई है. हर सुनवाई में कोर्ट में उपस्थित होना अनिवार्य किया गया है. जमानत के लिए 50 हजार रुपये का मुचलका भरा गया. सोनम को जमानत मिलने के पीछे सबसे बड़ी वजह पुलिस की गंभीर चूक मानी जा रही है. गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गलत धारा दर्ज कर दी गई थी. हत्या जैसे गंभीर अपराध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) लगनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय धारा 403(1) दर्ज कर दी गई, जो संपत्ति के दुरुपयोग से संबंधित है. इस तकनीकी गलती ने पूरे मामले को कमजोर कर दिया.
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला
अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी को सही जानकारी न देना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत आरोपी को गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट रूप से बताना आवश्यक होता है. इस प्रक्रिया में हुई चूक को अदालत ने गंभीर माना और जमानत देने का आधार बनाया. मामले में एक और अहम कमी यह रही कि पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि जब सोनम को गाजीपुर कोर्ट में पेश किया गया, तब उसे कानूनी सहायता मिली थी या नहीं. दस्तावेजों में वकील की मौजूदगी का कोई ठोस उल्लेख नहीं था. इसे भी अदालत ने आरोपी के अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा.
लंबी हिरासत और धीमी सुनवाई का असर
सोनम करीब 11 महीने से जेल में थी और केस की सुनवाई भी धीमी गति से चल रही थी. इस स्थिति ने भी जमानत के पक्ष में माहौल बनाया. अदालत ने इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए राहत देने का निर्णय लिया. मुख्य आरोपी को जमानत मिलने के बाद अब इस केस के अन्य आरोपियों को भी राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है. कानूनी जानकारों का मानना है कि अब अन्य आरोपी भी इसी आधार पर जमानत की मांग कर सकते हैं.
परिवार में नाराजगी, CBI जांच की मांग
सोनम को जमानत मिलने के बाद मृतक राजा रघुवंशी के परिवार में नाराजगी है. उसके भाई ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है, जबकि मां ने मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई है. पुलिस का दावा है कि 23 मई से पहले भी तीन बार हत्या की कोशिश की गई थी. 21 मई को गुवाहाटी में पहली कोशिश असफल रही, जिसके बाद मेघालय में साजिश को अंजाम दिया गया.
चार्जशीट में क्या है पुलिस का दावा
मेघालय पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता सोनम रघुवंशी ही है. उसके साथ उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और तीन अन्य आरोपी*आकाश सिंह राजपूत, विशाल सिंह चौहान और आनंद कुर्मी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, इन सभी ने मिलकर हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया.
हत्या की साजिश और वारदात का विवरण
चार्जशीट के अनुसार, 23 मई को सोहरा क्षेत्र में राजा रघुवंशी की हत्या की गई. आरोप है कि विशाल सिंह ने सबसे पहले धारदार हथियार से हमला किया, जिसके बाद अन्य आरोपियों ने सहयोग किया. सोनम भी घटनास्थल पर मौजूद थी और उसने पूरी वारदात में सक्रिय भूमिका निभाई.
सबूतों के आधार पर तैयार चार्जशीट
करीब 790 पन्नों की चार्जशीट में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा, किराए के वाहन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का हवाला दिया है. पुलिस का कहना है कि उसके पास आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत हैं.