Raghav Chadha: पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम राज्य की वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से हटाए जाने के बाद एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. चड्ढा, जो पहले आम आदमी पार्टी (AAP) का प्रतिनिधित्व करते थे और इस साल की शुरुआत में BJP में शामिल हुए थे, उन्होंने सत्ताधारी AAP सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से ऐसा करने का आरोप लगाया है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब चुनाव आयोग ने अपनी ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ प्रक्रिया के तहत अपडेटेड ड्राफ्ट लिस्ट जारी की. चड्ढा का नाम उन लोगों की लिस्ट में शामिल था जिन्हें ‘अनुपस्थित’ (Absent), ‘शिफ़्टेड’ (Shifted), ‘मृत’ (Deceased) और ‘डुप्लिकेट’ (Duplicate) कैटेगरी में मार्क किया गया था; अधिकारियों ने उनके स्टेटस को ‘स्थायी रूप से शिफ़्टेड’ (permanently shifted) के तौर पर मार्क किया था.
सीधे दखल के आरोप
चड्ढा ने इस वर्गीकरण का कड़ा विरोध किया. उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक, मौजूदा सांसदों का नाम ड्राफ़्ट लिस्ट में बना रहना चाहिए, भले ही उन पर कोई सवाल (flag) उठाया गया हो, ताकि पब्लिक विंडो के दौरान ज़रूरी वेरिफिकेशन किया जा सके. उन्होंने कहा कि नाम हटाना प्रक्रिया के नियमों का जानबूझकर किया गया उल्लंघन है और आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए इस प्रक्रिया में हेरफेर की.
चड्ढा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से अपना वोटर बेस शिफ़्ट करने के बाद 2024 के लोकसभा चुनावों में SAS नगर (मोहाली) से वोट डाला था. उन्होंने कहा कि वह औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराएंगे ताकि यह पक्का हो सके कि उनका नाम फ़ाइनल वोटर लिस्ट में वापस आ जाए.
सरकार और AAP का जवाब
इन दावों को खारिज करते हुए, पंजाब प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ़ किया कि रिविज़न की प्रक्रिया पूरी तरह से भारत के चुनाव आयोग द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) के माध्यम से मैनेज की जाती है, इसलिए इसमें राज्य सरकार के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है. AAP के प्रतिनिधियों ने चड्ढा के बयानों का जवाब देते हुए कहा कि वोटर लिस्ट का मैनेजमेंट पूरी तरह से स्वतंत्र चुनाव अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है. पार्टी का कहना है कि चड्ढा मुख्य रूप से दिल्ली में रहते हैं, इसलिए उनके वोटर क्रेडेंशियल्स को बनाए रखना या ट्रांसफर करना उनकी अपनी ज़िम्मेदारी है, न कि सरकार का मामला.