Pakistan Kamikaze Drone vs India S-400: पाकिस्तान का D-248 कामिकेज ड्रोन इन दिनों चर्चा में हैं. इसके पीछे की वजह बताई जा रही है कि इसकी रेंज और क्षमता इसे भारतीय इलाके में काफी अंदर तक पहुंचने में मदद कर सकती है. हैवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला (HIT) द्वारा विकसित और इंडस रोबोटिक्स एंड ऑटोनॉमस सिस्टम्स (RAS) एक्सपो में आधिकारिक तौर पर पेश किया गया. बताया जा रहा है कि यह लंबी दूरी का, बिना पूंछ वाला डेल्टा-विंग ड्रोन, खुद से काम करने (ऑटोनॉमस ऑपरेशन) के लिए डिजाइन किया गया एक ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ है.
इसके रेंज की बात करें तो यह 2,200 से 3,000 किलोमीटर है और यह 12 से 14 घंटे तक उड़ान भर सकता है, साथ ही इसका AI-असिस्टेड नेविगेशन सिस्टम जीपीएस पर निर्भर किए बिना काम करने के लिए बनाया गया है. ऐसे में भारत के सामने एक अहम सवाल खड़ा होता है कि क्या S-400 (जिसे सुदर्शन चक्र भी कहा जाता है) इसे डिटेक्ट करके रोक सकता है और यह खतरा कितना गंभीर हो सकता है? आज इस आर्टिकल में इन्हीं सब सवालों के जवाब जानने की कोशिश करेंगे.
स्पीड कितनी है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, D-248 का डिजाइन काफी हद तक ईरान के Shahed-136 प्लेटफ़ॉर्म जैसा है. HIT की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इसकी क्रूज स्पीड 185 km/h है और यह अधिक से अधिक 225 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकता है. यह 4500 मीटर (लगभग 14,760 फीट) तक की ऊंचाई पर उड़ सकता है और 30 से 50 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जा सकता है. बताया जाता है कि यह 2,200 से 3,000 किलोमीटर की रेंज को कवर कर सकता है.
जिससे भारत का लगभग पूरा इलाका इसकी सैद्धांतिक मारक क्षमता के दायरे में आ जाता है. इसके अलावा, जानकारी सामने आ रही है कि यह 12 से 14 घंटे तक हवा में उड़ान भर सकता है, जो इसे युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन की तुलना में कहीं ज्यादा टिकाऊ बनाता है. इसका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित टारगेटिंग सिस्टम GPS तकनीक के बिना भी काम कर सकेगा.
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भारत का S-400 कर पाएगा डिटेक्ट?
भारत के S-400 में मल्टी-फंक्शन फेज़्ड-एरे रडार लगे हैं, जो D-248 जैसे कम ऊंचाई पर उड़ने वाले और धीमी गति से चलने वाले हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम हैं. यह सिस्टम एक साथ लगभग 80-100 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है. हालांकि, जब लक्ष्य कम ऊंचाई पर उड़ता है तो उस पर हमला करने के लिए ड्रोन का समय रहते पता लगाना मुश्किल हो सकता है.
पूरी तरह नष्ट हो जाएगा पाकिस्तान का ड्रोन
D-248 की धीमी गति और कम लागत वाली कम्पोजिट बनावट के कारण ‘टेरेन मास्किंग’ (इलाके की आड़ लेना) संभव हो सकता है, जिसमें पहाड़ और घाटियां ड्रोन को रडार से लंबे समय तक छिपाए रख सकते हैं. कागज पर S-400 इंटरसेप्टर आमने-सामने की लड़ाई में D-248 को नष्ट कर सकता है. लेकिन अगर लागत की बात करें तो S-400 इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर है, जबकि D-248 जैसे कामिकेज ड्रोन की अनुमानित कीमत केवल कुछ दसियों हजार डॉलर है.
भारत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है ड्रोन?
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता एक ड्रोन की नहीं, बल्कि एक साथ दर्जनों ड्रोनों के आने की है. एक साथ हुए हमले से वायु रक्षा रडार निष्क्रिय हो सकते हैं और भारत को अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोनों के खिलाफ महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. इससे मिसाइल भंडार खत्म हो सकता है और तेज गति वाली क्रूज या बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए रास्ता खुल सकता है. पाकिस्तान महंगे लड़ाकू विमानों या बैलिस्टिक मिसाइलों पर निर्भर हुए बिना अंतरराष्ट्रीय सीमा से दूर स्थित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, कमांड केंद्रों और आर्थिक केंद्रों को निशाना बना सकता है.
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