Home > देश > होटल में मिली नजरें, फिर इश्क में लांघी धर्म की दीवार… शादी-बच्चे, 32 साल बाद हुए अलग, जानें उमर-पायल की लव स्टोरी!

होटल में मिली नजरें, फिर इश्क में लांघी धर्म की दीवार… शादी-बच्चे, 32 साल बाद हुए अलग, जानें उमर-पायल की लव स्टोरी!

कभी भारतीय राजनीति और गलियारों में उमर और पायल की लव स्टोरी मिसाल मानी जाती थी. एक मशहूर मुस्लिम राजनीतिक घराने के चिराग और एक पूर्व सेना अधिकारी की सिख बेटी की यह प्रेम कहानी जितनी खूबसूरत थी, इसका अंत उतना ही भावुक रहा.

By: Kajal Jain | Published: July 31, 2026 6:27:15 PM IST



जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रहीं पत्नी पायल अब्दुल्ला के बरसों पुराने शादीशुदा रिश्ते का आखिरकार अब अंत हो गया है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि दोनों ने आपसी सहमति से अपने विवाह को समाप्त करने का फैसला कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट में उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ को बताया कि दोनों पक्षों ने मध्यस्थता (Mediation) के जरिए अपने सभी विवादों को सुलझा लिया है. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत, सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) की अर्जी दाखिल की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.  दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी पुराने मामलों को वापस लेने पर भी सहमत हो गए हैं. इसी के साथ, दोनों के बीच सालों से चल रहा कानूनी विवाद और एक फेयरीटेल लव स्टोरी का हमेशा के लिए अंत हो गया.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कभी भारतीय राजनीति और गलियारों में उमर और पायल की लव स्टोरी मिसाल मानी जाती थी. एक मशहूर मुस्लिम राजनीतिक घराने के चिराग और एक पूर्व सेना अधिकारी की सिख बेटी की यह प्रेम कहानी जितनी खूबसूरत थी, इसका अंत उतना ही भावुक रहा. आइए जानते हैं उमर अब्दुल्ला और पायल की पहली मुलाकात से लेकर, उनकी अंतरधार्मिक शादी, दोनों बेटों जहीर और जमीर और अलग होने के पूरे सफर के बारे में:

ओबेरॉय होटल में पहली मुलाकात

यह बात 1990 के दशक के शुरुआती दिनों की है. उमर अब्दुल्ला उस समय राजनीति में कदम रखने से दूर, दिल्ली के मशहूर द ओबेरॉय होटल में एक मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के रूप में काम कर रहे थे. इसी होटल में उनकी मुलाकात पायल नाथ से हुई. पायल के पिता राम नाथ भारतीय वायु सेना में मेजर जनरल रह चुके थे. दोनों एक ही जगह काम करते थे और देखते ही देखते उनकी दोस्ती गहरी हो गई, जो जल्द ही प्यार में बदल गई.

परिवार को मनाया और अंतरधार्मिक विवाह

उमर अब्दुल्ला कश्मीर के सबसे पावरफुल मुस्लिम राजनीतिक घराने (अब्दुल्ला परिवार) से आते हैं, जबकि पायल एक सिख परिवार से थीं. अलग-अलग धर्म और पृष्ठभूमि होने के कारण शुरुआत में परिवार की ओर से कुछ हिचकिचाहट जरूर थी. हालांकि, उमर और पायल अपने रिश्ते को लेकर बेहद गंभीर थे. उन्होंने अपने-अपने परिवारों को मनाया और आखिरकार 1 सितंबर 1994 को दोनों शादी के बंधन में बंध गए. उनकी शादी भारतीय राजनीति में अंतरधार्मिक विवाह के एक चर्चित उदाहरण के रूप में देखी गई.

दो बेटे: ज़हीर और ज़मीर

शादी के बाद पायल और उमर की जिंदगी में दो बेटों का आगमन हुआ- ज़हीर और ज़मीर. जब उमर अब्दुल्ला राजनीति में सक्रिय हुए और बाद में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने, तो पायल ने दिल्ली में रहकर दोनों बेटों की परवरिश की जिम्मेदारी संभाली. पायल ने अपने बेटों को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखा और उनके करियर पर ध्यान दिया. ज़हीर और ज़मीर दोनों ने अपनी पढ़ाई पूरी की और अब वे अपने-अपने करियर में एक्टिव हैं.

रिश्तों में खटास और अलगाव 

साल 2009 के आसपास उमर और पायल के शादीशुदा रिश्ते में दूरियां आने लगीं. 2011 में यह खबर सामने आई कि दोनों एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं. आखिरकार, उमर अब्दुल्ला ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी, लेकिन साल 2016 में कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि उमर यह साबित करने में नाकाम रहे कि शादी पूरी तरह टूट चुकी है या उनके साथ क्रूरता हुई है. इसके बाद उमर ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली. इस दौरान पायल अब्दुल्ला ने कोर्ट से अपने और अपने दोनों बेटों के लिए गुजारा भत्ते की मांग की और निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी.

अब सुप्रीम कोर्ट में अंतिम समझौता 

सालों तक अदालतों में चली इस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, आखिरकार दोनों पक्षों ने आपसी समझबूझ से विवाद सुलझाने का फैसला किया. सुप्रीम कोर्ट में उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दोनों ने मध्यस्थता (Mediation) के जरिए सभी मतभेदों को सुलझा लिया है. संविधान के आर्टिकल 142 के तहत दोनों ने आपसी सहमति से तलाक की गुहार लगाई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया. 30 साल पहले शुरू हुई इस लव स्टोरी का यह औपचारिक और शांतिपूर्ण अंत रहा, जहां दोनों ने एक-दूसरे को सम्मानपूर्वक विदा किया.

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