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NEET protests: सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को सलाह, पुलिस की ज्यादतियों की जांच के लिए बनाई जा सकती है SIT

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि जिसने भी ज्यादती की है या कानून को अपने हाथ में लिया है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए. इसके साथ ही CJI सूर्यकांत ने पुलिस की बर्बरता की स्वतंत्र जांच की भी मांग की.

By: JP Yadav | Published: July 28, 2026 1:16:40 PM IST



सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हालिया छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की सभी घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा सकता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि  निर्धारित प्रोटोकॉल  का उल्लंघन होने पर कानून को अपना काम करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया सख्त संदेश

वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 20 जुलाई के मार्च के दौरान छात्र विरोध प्रदर्शनों पर सुरक्षा कार्रवाई को लेकर  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को एक सख्त संदेश दिया है. 

कानून अपना काम करेगा

उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह से स्वतंत्र होनी चाहिए. जिसने भी ज्यादती की है, कानून अपना काम करेगा. अगर कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं की जाती है तो जांच का कोई मतलब नहीं है.  सुनवाई के दौरान जब वकीलों ने इलेक्ट्रिक बैटन के कथित इस्तेमाल का मुद्दा उठाया तो CJI कांत ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच पर जोर दिया. बताया जा रहा है कि आंतरिक जांच से पता चला है कि जंतर-मंतर पर CJP विरोध प्रदर्शन के बीच 20 जुलाई को कई RAF जवानों को पैलेट गन दी गई थीं.

छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा कर चुके हैं CJI

इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को CJP के ‘चलो संसद मार्च’ के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की थी.CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वह प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों को लगी चोटों को लेकर भी उतनी ही चिंतित है. इस बात पर जोर दिया कि एक काम करती हुई डेमोक्रेसी के लिए प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों द्वारा स्व-अनुशासन जरूरी है. इसे गलत तरीके से न लें. अगर ज्यादती हुई है तो निष्पक्ष रूप से इसकी जांच की जा सकती है कि किसने ऐसा किया है. 

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली का सवाल नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत का मुद्दा है. ऐसा नहीं हो सकता कि विरोध प्रदर्शन हो और इसलिए लाठीचार्ज हो जाए. ऐसा भी नहीं हो सकता कि इन विरोध प्रदर्शनों में हिंसा हो. जस्टिस कांत ने कहा. इसके साथ ही, बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ AK-47 राइफ़ल के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया, जिस पर CJI ने कहा कि वे पूरे देश में प्रदर्शनों से जुड़ी गाइडलाइंस पर विचार करेंगे.

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