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23.75 मीटर चौड़ी और 9 KM लंबी…मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर बने मिसिंग लिंक की क्या खासियत है?

Mumbai Pune Expressway: मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर बने मिसिंग लिंक और केबल स्टेड पुल की खूब चर्चा हो रही है. मिसिंग लिंक 23.75 मीटर चौड़ी और 8.9 किलोमीटर लंबी है. जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की रेस में है.

By: Sohail Rahman | Published: May 6, 2026 3:26:52 PM IST



Mumbai Pune Expressway: 23.75 मीटर चौड़ी और आठ लेन वाली ‘मिसिंग लिंक’ की 8.9 किलोमीटर लंबी सुरंग दुनिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंग के तौर पर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की दौड़ में है. यह इस बात का सबूत है कि महाराष्ट्र वह कर सकता है, जिसे करने की हिम्मत बहुत कम देश जुटा पाते हैं. लोनावाला झील के तल से 170 फीट नीचे निर्माण दल ने लगभग असंभव परिस्थितियों में काम किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऊपर बन रही सुरंग से जल स्तर (water table) पर कोई असर न पड़े. इसके लिए जिस सटीकता की जरूरत थी, वह वैश्विक मानकों के हिसाब से भी असाधारण थी.

‘टाइगर वैली’ केबल-स्टेड पुल घाटी के तल से 170 से 180 मीटर ऊपर तक फैला हुआ है, जो लगभग 55 मंज़िला इमारत की ऊंचाई के बराबर है और इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह उन तेज़ हवाओं का सामना कर सके, जो सह्याद्री पर्वतमाला हर मॉनसून में पश्चिमी घाट की ओर भेजती है.

भारत के सबसे मुश्किन रास्तों में से एक है मिसिंग लिंक

13.3 किलोमीटर लंबा ‘मिसिंग लिंक’ कॉरिडोर भारत के सबसे मुश्किल सड़क रास्तों में से एक की जगह लेता है, यह उसी पुराने ‘घाट’ वाले बुरे सपने का सिर्फ़ एक चौड़ा रूप नहीं है, बल्कि इसमें ऐसी सुरंगें, वायडक्ट और पुल शामिल हैं जो पहाड़ों के ऊपर से रेंगने के बजाय उन्हें काटकर रास्ता बनाते हैं. 640 से 650 मीटर तक फैला ‘टाइगर वैली’ पुल एशिया के सबसे ऊंचे सड़क पुलों में से एक है.

इसके डिज़ाइन के लिए हवा के दबाव की जांच (wind-load testing) विदेशों में बनी विशेष सुविधाओं में की गई थी, जो किसी भी भारतीय राजमार्ग परियोजना के लिए एक दुर्लभ कदम है और यह दिखाता है कि इंजीनियरों ने सह्याद्री के मौसम को कितनी गंभीरता से लिया था.

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यह एक अलग तरह का राजमार्ग ढांचा है

आठ लेन, आपातकालीन शोल्डर, पूरी तरह से नियंत्रित पहुंच और तेज़ रफ़्तार यातायात को संभालने के लिए बनाई गई सुरंगें ‘मिसिंग लिंक’ सिर्फ़ एक सड़क चौड़ीकरण परियोजना नहीं है जिसे कुछ बड़ा दिखाने की कोशिश की गई हो. यह भारत के लिए बुनियादी तौर पर एक अलग तरह का राजमार्ग ढांचा है. एक जीवित झील के नीचे कई सालों तक सुरंग बनाने का काम, मॉनसून के दौरान निर्माण के लिए हफ़्तों में गिने जाने वाले छोटे-छोटे मौके और वन विभाग से मंज़ूरी लेने में आई कानूनी अड़चनें ‘मिसिंग लिंक’ को पूरा होने में योजना से कहीं ज़्यादा समय लगा, लेकिन पश्चिमी घाट से जो परियोजना निकलकर सामने आई है, वह अपनी देरी को लेकर हुए विवादों से कहीं ज़्यादा समय तक टिकी रहेगी.

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हर हफ्ते गुजरते हैं लाखों वाहन

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से हर हफ़्ते लाखों वाहन गुज़रते हैं और दशकों तक उनमें से हर एक वाहन को ‘घाट’ वाले हिस्से से रेंगते हुए गुज़रना पड़ता था; यह एक ऐसा रास्ता था जिसमें तीखे मोड़, खड़ी चढ़ाइयां और मॉनसून की धुंध होती थी, जो खराब दिनों में तीन घंटे की यात्रा को पांच घंटे की एक थका देने वाली मुसीबत में बदल देती थी. ‘मिसिंग लिंक’ का अस्तित्व इसलिए है, क्योंकि उस मुसीबत का आखिरकार एक समाधान मिल गया.

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