Home > देश > ममता बनर्जी से बड़ा कोई नेता नहीं… TMC में असली-नकली की जंग तेज, सांसद कीर्ति आजाद ने बागी गुट पर साधा निशाना

ममता बनर्जी से बड़ा कोई नेता नहीं… TMC में असली-नकली की जंग तेज, सांसद कीर्ति आजाद ने बागी गुट पर साधा निशाना

TMC Leadership Dispute: MP कीर्ति आज़ाद ने कहा इलेक्शन कमीशन ने नकली गुट और हमारे असली गुट, दोनों को डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए 6 जुलाई की डेडलाइन तय की थी. नकली गुट आखिरी मिनट तक कुछ भी जमा नहीं कर पाया. आम तौर पर, तय तारीख तक डॉक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं, लेकिन वे बाद में कई बदलाव करते रहे.

By: Shristi S | Published: July 13, 2026 2:52:05 PM IST



Kirti Azad on TMC Rebel Group: इलेक्शन कमीशन ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ऋतब्रत गुट को TMC लीडरशिप, इलेक्शन सिंबल और साइन करने वालों के बारे में अपने दावों को सपोर्ट करने के लिए डॉक्यूमेंट्स जमा करने का आदेश दिया है. इस मामले पर TMC MP कीर्ति आज़ाद ने ऋतब्रत गुट से सवाल किए.

PTI से बात करते हुए MP कीर्ति आज़ाद ने कहा इलेक्शन कमीशन ने नकली गुट और हमारे असली गुट, दोनों को डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए 6 जुलाई की डेडलाइन तय की थी. नकली गुट आखिरी मिनट तक कुछ भी जमा नहीं कर पाया. आम तौर पर, तय तारीख तक डॉक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं, लेकिन वे बाद में कई बदलाव करते रहे.

ममता बनर्जी से बड़ा कोई लीडर नहीं- कीर्ति आज़ाद

MP कीर्ति आज़ाद ने आगे कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ गए थे, वे अब अलग-अलग जगहों पर ऑफिस बना रहे हैं और खुद को असली पार्टी बताने की कोशिश कर रहे हैं. यह सबको बिल्कुल साफ है कि कौन असली है और कौन नकली. इलेक्शन कमीशन की सच्चाई सबको पता है. वे बस एक साथ साज़िश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि बंगाल में ममता बनर्जी से बड़ा कोई लीडर नहीं है.

आयुष्मान दिवस पर उन्होंने क्या कहा?

पश्चिम बंगाल सरकार 16 अगस्त को आयुष्मान दिवस मनाएगी. इस बारे में TMC MP कीर्ति आज़ाद ने कहा असल में, आयुष्मान दिवस से किसी को फ़ायदा नहीं हो रहा है. पहले, स्वास्थ्य साथी स्कीम के तहत, जिसके पास घर, कार या मोटरसाइकिल थी, उसे पैसे मिल सकते थे. वे आसानी से किसी भी प्राइवेट या सरकारी हॉस्पिटल में जाकर पैसे ले सकते थे.

आयुष्मान भारत के फ़ायदों के बारे में उन्होंने क्या कहा?

उन्होंने आगे कहा कि आयुष्मान भारत स्कीम में कई कमियां हैं. घर में साइकिल, मोटरसाइकिल या टीवी होने पर भी आप इसके लिए अयोग्य हो जाते हैं. अभी तक बेनिफिशियरी की सही लिस्ट नहीं बनी है, तो लोग फ़ायदे की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? यह अभी भी 2011-2012 के सेंसस डेटा पर आधारित है. तब से, आबादी तेज़ी से बढ़ी है, जिससे मौजूदा सिस्टम बेकार हो गया है. दिखावे के लिए, अखबारों में फोटो छपवाने, विज्ञापन चलाने और टीवी पर प्रमोशनल वीडियो दिखाने के अलावा, ‘आयुष्मान भारत’ ने किसी को कोई असली फ़ायदा नहीं पहुंचाया है.

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