Vande Mataram: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2026) में मिली जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है. इस बैठक में यह तय किया गया कि ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर का दर्जा दिया जाएगा. इसके अलावा, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दे दी गई.
कैबिनेट के इस फैसले के मुताबिक, राष्ट्रगान पर अभी जो नियम और पाबंदियां लागू हैं, वे अब बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ पर भी लागू होंगी. इसका मतलब है कि अगर कोई इस गीत का अपमान करता है या इसके गायन में कोई रुकावट डालता है, तो उसे सज़ा देने का प्रावधान होगा. अभी कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान या राष्ट्रगान का अपमान करने पर जेल, जुर्माना या दोनों की सज़ा हो सकती है; अब ‘वंदे मातरम’ को भी इसी श्रेणी में शामिल कर लिया गया है.
अधिनियम में संशोधन की तैयारी
इस संशोधन के तहत, अधिनियम की धारा 3 में बदलाव किया जाएगा. मौजूदा प्रावधानों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान के गायन में रुकावट डालता है या किसी ऐसी सभा में बाधा उत्पन्न करता है जहां राष्ट्रगान गाया जा रहा हो तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. कानून में यह भी प्रावधान है कि बार-बार ऐसा करने वालों को कम से कम एक साल की सजा दी जाएगी. कानूनी दायरे से हटकर देखें तो, यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है. इससे पहले 2005 में कानून में संशोधन करके राष्ट्रीय ध्वज के अपमानजनक इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी.
यह भी पढ़ें – पश्चिम बंगाल में कब होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह? अग्निमित्रा पॉल को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
वंदे मातरम को लेकर उठी थी ये मांग
पिछले दिसंबर में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में संसद में एक विशेष चर्चा हुई थी. इस सत्र के दौरान यह मांग उठाई गई थी कि इसे राष्ट्रगान के बराबर का दर्जा दिया जाए. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि तुष्टीकरण की राजनीति के चलते इस गीत को हाशिए पर धकेल दिया गया था और इसे सांप्रदायिक रंग दे दिया गया था. इस साल जनवरी में गृह मंत्रालय ने भी ‘वंदे मातरम’ के गायन और पालन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे. इन दिशा-निर्देशों के तहत प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों के दौरान इस गीत के सभी छह छंदों को गाने के निर्देश दिए गए थे.
यह भी पढ़ें – बंगाल की वो सीट जहां 24 घंटे से चल रही है काउंटिंग, अभी तक नहीं आया रिजल्ट; जानें क्यों हो रही देरी