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Kisan Andolan 2026 Delhi : आज फिर लग सकता है महाजाम, US ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली आ रहे हजारों किसान

Kisan Andolan 2026 Delhi : किसानों का कहना है कि प्रस्तावित समझौते का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे छोटे कारोबार और दूसरे सेक्टर में रोज़गार के मौकों पर भी असर पड़ेगा.

By: JP Yadav | Published: July 21, 2026 8:04:05 AM IST



Kisan Andolan 2026 Delhi : देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (हरियाणा से सटे) के इलाकों में मंगलवार (21 जुलाई,, 2026) को जाम लग सकता है. इससे पहले सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में धरना प्रदर्शन के चलते लोगों का खासतौर से वाहन चालकों को खासी दिक्कत आई थी. मिली जानकारी के मुताबिक, भारत-US के बीच प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट (व्यापार समझौते) के विरोध में 21 जुलाई को होने वाली महापंचायत के लिए पंजाब के किसान दिल्ली जा रहे हैं. पंजाब के किसान नेताओं का कहना है कि इस समझौते से छोटे किसानों, व्यापारियों और नौकरियों पर बुरा असर पड़ सकता है. इसके साथ ही किसान संगठनों ने इसके विरोध में बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है. किसान संगठनों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक दिल्ली में आंदोलन जारी रखेंगे. 

550 किसान यूनियन और सामाजिक संगठन लेंगे हिस्सा

यहां पर बता दें कि पंजाब से किसानों का एक बड़ा जत्था रविवार (19 जुलाई, 2026) को ही दिल्ली के लिए रवाना हुआ है, जिससे वो मंगलवार (21 जुलाई, 2026) को भारत-US के बीच प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट के विरोध में होने वाली महापंचायत में हिस्सा ले सकें. दिल्ली के किसान घाट पर होने वाली इस सभा को देश बचाओ मोर्चा ने बुलाया है. आयोजकों का दावा है कि इसमें देश भर से करीब 550 किसान यूनियन और सामाजिक संगठन हिस्सा लेंगे.

देशभर के किसान होंगे प्रभावित

पंजाब के ब्यास से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के नेता जर्मनजीत सिंह बंडाला ने आरोप लगाया कि भारत-US के बीच प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम जनता पर बुरा असर पड़ेगा. उन्होंने दावा किया कि इस समझौते का मकसद अमेरिकी कंपनियों और किसानों को फायदा पहुंचाना है, जबकि भारत के छोटे और सीमांत किसानों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है. 

अमेरिका की तरह मिले सब्सिडी

जर्मनजीत सिंह बंडाला का कहना है कि  अमेरिकी खेती बहुत बड़े पैमाने पर होती है, जहां खेत हजारों एकड़ में फैले होते हैं और उन्हें सरकार से भारी सब्सिडी मिलती है. इसके उलट ज्यादातर भारतीय किसानों के पास सिर्फ दो से ढाई एकड़ भूमि होती है और उन्हें बहुत कम आर्थिक मदद मिलती है. उन्होंने दावा किया कि अगर समझौते के तहत अमेरिका से सस्ता कृषि सामान भारतीय बाज़ार में आता है, तो छोटे भारतीय किसानों के लिए मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे खेती से होने वाली कमाई में भारी गिरावट आएगी. उन्होंने कहा कि  अगर केंद्र सरकार प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द नहीं करती और किसानों की मांगों को पूरा नहीं करती, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा. 

 

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