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Inspirational Story: मजदूर की बेटी महक ने रचा इतिहास, राष्ट्रीय हैंडबॉल में जीता पदक, अब भारत के लिए खेलने का सपना

Inspirational Story: आर्थिक तंगी के बावजूद मजदूर की बेटी महक ने हैंडबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. उनकी प्रेरणादायक सफलता, अभ्यास और बड़े सपनों की कहानी के बारे में यहां जान सकते हैं.

By: Munna Verma | Published: August 1, 2026 4:13:03 PM IST



Inspirational Story: कहा जाता है कि अगर सपनों के साथ मेहनत और हौसला जुड़ जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती. इस बात को सच साबित कर रही हैं हरियाणा के गांव ग्योंग की 15 वर्षीय हैंडबॉल खिलाड़ी महक, जिन्होंने सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है. पिता की मेहनत, परिवार का साथ और खुद का अनुशासन आज उन्हें लगातार सफलता की ओर ले जा रहा है.

महक के पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद उन्होंने कभी बेटी के सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया. पढ़ाई के साथ-साथ खेल में आगे बढ़ने के लिए परिवार हर संभव सहयोग कर रहा है, जिसका परिणाम आज राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहा है.

पांच साल की मेहनत ने दिलाई नई पहचान

महक फिलहाल आरोही मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ग्योंग में पढ़ाई कर रही हैं. पिछले पांच वर्षों से वह गांव के हैंडबॉल ग्राउंड में नियमित अभ्यास कर रही हैं. उनके कोच रविंद्र के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी तकनीक, फिटनेस और खेल कौशल को लगातार बेहतर बनाया है. उनकी सफलता के पीछे सबसे बड़ी ताकत उनका अनुशासन है. महक हर दिन सुबह 5 बजे से 7 बजे तक और शाम 4 बजे से 7 बजे तक अभ्यास करती हैं. रोजाना पांच घंटे का कठिन प्रशिक्षण उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है.

राष्ट्रीय स्तर पर कई बार किया प्रदेश का प्रतिनिधित्व

महक अब तक तीन बार राष्ट्रीय स्कूल हैंडबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपने जिले और हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में वर्ष 2023-24 की अंडर-14 राष्ट्रीय स्कूल हैंडबॉल प्रतियोगिता में रजत पदक जीतना शामिल है. इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर उनके नाम दो पदक दर्ज हैं, जो उनकी निरंतर मेहनत और शानदार प्रदर्शन की गवाही देते हैं.

भारत के लिए खेलने का है सपना

महक का लक्ष्य केवल राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है. उनका सपना भारतीय टीम की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करना है. वह मानती हैं कि लगातार अभ्यास, बेहतर प्रशिक्षण और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है.

पिता का संघर्ष बना बेटी की ताकत

महक के पिता रिंकू का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति आसान नहीं है, लेकिन बेटी की प्रतिभा और मेहनत देखकर वे हर संभव सहयोग करने की कोशिश करते हैं. उनके लिए सबसे बड़ी खुशी बेटी को अपने सपनों की ओर बढ़ते देखना है. यह कहानी उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों के भविष्य को संवारने का सपना देखते हैं.

कोच को है अंतरराष्ट्रीय सफलता का भरोसा

महक के कोच रविंद्र के अनुसार, वह बेहद मेहनती, अनुशासित और समर्पित खिलाड़ी हैं. यदि उन्हें बेहतर सुविधाएं, आधुनिक प्रशिक्षण और लगातार अवसर मिलते रहे तो भविष्य में वह राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम रोशन कर सकती हैं.

महक की सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा आर्थिक परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती. कठिन मेहनत, परिवार का विश्वास और सही मार्गदर्शन किसी भी खिलाड़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है. उनकी कहानी आज न केवल खेल जगत बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करने के लिए संघर्ष कर रहा है.

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