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IMD Weather Update El Nino 2026: जुलाई में हुई झमाझम बारिश से लोगों को भले ही गर्मी और उमस से राहत मिली हो, लेकिन अब मौसम वैज्ञानिकों ने अगस्त को लेकर नई चिंता जताई है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा आकलन के मुताबिक, प्रशांत महासागर में बन रही मजबूत अल नीनो (El Nino) की स्थिति अगस्त से मानसून की रफ्तार धीमी कर सकती है. इसका असर खेती, जल संकट और सामान्य जनजीवन पर भी पड़ सकता है.
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगस्त में देशभर में बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के करीब 94 फीसदी रह सकती है, यानी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो कई राज्यों में खेती और जल स्रोतों पर असर पड़ सकता है.दूसरी ओर, WMO ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में अल नीनो और ज्यादा मजबूत हो सकता है. ऐसे में मानसून के दूसरे चरण में बारिश कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.
क्या है सुपर अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2.9 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है. इसे बेहद मजबूत अल नीनो की स्थिति माना जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि जब अल नीनो ज्यादा प्रभावी होता है, तब भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं और कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होती है.
दुनिया के मौसम पर भी पड़ेगा असर
WMO का कहना है कि मजबूत अल नीनो के साथ महासागरों का बढ़ता तापमान और पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल (IOD) मिलकर दुनिया के मौसम का पैटर्न बदल सकते हैं. इसकी वजह से कुछ देशों में सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं.संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी हाल ही में कहा कि अल नीनो अब सिर्फ दस्तक नहीं दे रहा, बल्कि पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और बढ़ा सकता है.
इस साल कैसा रहा मानसून?
इस बार मानसून की चाल शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव वाली रही है. जून में मानसून कमजोर रहा और देशभर में सामान्य से करीब 39.8 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जिससे यह पिछले कई दशकों के सबसे सूखे जून महीनों में शामिल रहा.हालांकि जुलाई में कम दबाव के कई सिस्टम बनने से मध्य, पश्चिमी और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई और बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो गई. लेकिन अब अगस्त के पूर्वानुमान ने फिर से चिंता बढ़ा दी है.