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IB अफसर अंकित शर्मा कौन थे? दिल्ली दंगों में क्या हुआ था, ताहिर हुसैन को क्यों सुनाई गई उम्रकैद की सजा?

दिल्ली में हुए दंगों के दौरान खजूरी इलाके में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की गई थी. पुलिस ने इस मामले में ताहिर हुसैन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया था. इस मामले में ताहिर हुसैन समेत कई अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. आइए जानते हैं अंकित शर्मा कौन थे?

By: Deepika Pandey | Published: July 31, 2026 5:38:49 PM IST



IB Officer Ankit Sharma: फरवरी 2020 में दिल्ली का एक हिस्सा अचानक ऐसी हिंसा की आग में झुलस उठा था, जिसे राजधानी शायद ही कभी भूल पाएगी. उत्तर-पूर्वी दिल्ली की गलियों में कहीं पत्थर बरस रहे थे, कहीं आग की लपटें उठ रही थीं और कहीं अपनों को बचाने के लिए लोग घरों में दुबके हुए थे. चांदबाग, मौजपुर, जाफराबाद और आसपास के इलाकों में भड़की हिंसा ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए. इसी खौफनाक माहौल में एक नाम सामने आया अंकित शर्मा, जो महज 26 साल के थे. 

नाले में मिला था शव

IB अधिकारी अंकित उस हिंसा में लापता हुए और अगले दिन उनका शव एक नाले से बरामद हुआ. एक युवा अफसर की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया और इस मामले की जांच की कड़ी ताहिर हुसैन तक जा पहुंची. करीब छह साल बाद अदालत के फैसले ने एक बार फिर उस भयावह रात और अंकित शर्मा की कहानी को सुर्खियों में ला दिया है.

कौन थे अंकित शर्मा?

26 वर्षीय अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में सिक्योरिटी असिस्टेंट के तौर पर काम करते थे. वह दिल्ली के खजूरी खास इलाके में रहते थे. फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़कने के दौरान वह ड्यूटी से बाहर अपने इलाके में मौजूद थे. वे अपने घर से कुछ सामान लेने के लिए बाहर निकले थे लेकिन वापस घर नहीं पहुंचे. 25 फरवरी 2020 को चांदबाग इलाके में हिंसा के बीच अंकित शर्मा लापता हो गए. अगले दिन, 26 फरवरी को उनका शव चांदबाग के पास एक नाले से बरामद हुआ. पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर कई चोटों और चाकू से किए गए वार के निशान मिले और उन्हें कुल 51 चोटें आई थीं.

उस दिन आखिर हुआ क्या था?

पुलिस की चार्जशीट और बाद में अदालत में पेश किए गए सबूतों के मुताबिक, 25 फरवरी को चांदबाग इलाके में हिंसक भीड़ जमा थी. अदालत में पेश गवाहों के अनुसार अंकित शर्मा वहां स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट की गई. पुलिस का आरोप था कि अंकित को भीड़ ने ताहिर हुसैन के घर की ओर खींचकर ले जाया, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई और शव को नाले में फेंक दिया गया. पुलिस ने यह भी कहा था कि घटना के प्रत्यक्ष CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं थे क्योंकि इलाके में कई कैमरे क्षतिग्रस्त या दूसरी दिशा में कर दिए गए थे. 

ताहिर हुसैन की क्या भूमिका थी?

ताहिर हुसैन उस समय आम आदमी पार्टी के पार्षद थे. दंगों के बाद उन पर अंकित शर्मा की हत्या और हिंसा में भीड़ की भूमिका से जुड़े गंभीर आरोप लगे. पुलिस की चार्जशीट में आरोप लगाया गया था कि ताहिर हुसैन ने भीड़ को उकसाया और उसके मकान का इस्तेमाल हिंसा के दौरान किया गया. बाद में चले मुकदमे में अभियोजन ने 91 गवाहों, मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक तथा दूसरे दस्तावेजी सबूत पेश किए. अदालत ने जुलाई 2026 में ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया और अब उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

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