Human Lifespan 150 Year: लंबी उम्र और हमेशा जवान दिखने की चाहत हर किसी का सपना होता है. इसके लिए लोग तमाम हेल्दी चीजों का सेवन करते हैं. यही नहीं, इंसानों को नई-नई खोजों की ओर ले जा रही है. हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वैज्ञानिक जगत के साथ-साथ आम लोगों का ध्यान खींचा है. दावा है कि, चीन एंटी-एजिंग दवा ‘एजियाओ’ बना रहा है. गधों की खाल से बनने वाली एक पारंपरिक दवा इंसान की उम्र 150 साल तक बढ़ाने में मददगार हो सकती है. इसकी बढ़ती मांग के कारण दुनिया भर में गधों की संख्या तेजी से घट रही है. इस संकट को देखते हुए ब्राजील के वैज्ञानिक अब लैब में गधे का कोलेजन तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं. उनका लक्ष्य 2027 तक ऐसा विकल्प तैयार करना है, जिससे गधों की हत्या कम हो सके और उनकी आबादी को बचाया जा सके.
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना का नेतृत्व ब्राजील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ पराना की पशु चिकित्सक और प्रोफेसर कार्ला मोलेंटो कर रही हैं. वैज्ञानिक ‘प्रिसिजन फर्मेंटेशन’ तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें गधे के कोलेजन का डीएनए यीस्ट जैसे सूक्ष्म जीवों में डाला जाता है. इससे बिना गधे की खाल इस्तेमाल किए वही कोलेजन तैयार किया जा सकता है. इस नई तकनीक से बनने वाला कोलेजन पारंपरिक उत्पाद जैसा ही होगा, लेकिन इसमें भारी धातुओं या बीमारी फैलाने वाले संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा. टीम 2027 तक बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रही है.
चीन में बन रही जवान रहने की दवा
चीन में ‘एजियाओ. (Ejiao) नाम की एक पारंपरिक दवा बनाई जाती है, जो गधों की खाल से प्राप्त जिलेटिन से तैयार होती है. पारंपरिक चीनी चिकित्सा पद्धति में इसका इस्तेमाल खून बढ़ाने, त्वचा को जवान रखने और शरीर को ताकत देने के लिए किया जाता रहा है. बता दें कि, ‘एजियाओ’ करीब 2000 साल पुरानी चीनी औषधि है, जिसे गधे की खाल उबालकर बनाया जाता है. चीन में इसे त्वचा को जवान रखने, झुर्रियां कम करने और हड्डियां मजबूत करने वाली दवा माना जाता है.
गधों की खास से बनती है यह दवा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस उद्योग को हर साल करीब 48 लाख गधों की खाल की जरूरत होती है, जबकि दुनिया में गधों की कुल आबादी लगभग 5.3 करोड़ है. गधे धीरे-धीरे प्रजनन करते हैं, इसलिए मांग के मुकाबले उनकी संख्या तेजी से कम हो रही है. शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर यही स्थिति रही तो अगले एक-दो दशकों में दुनिया के लगभग सभी गधे इस उद्योग की चपेट में आ सकते हैं.
गधों की घटती संख्या बनी चिंता
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देश गधों की खाल के बड़े स्रोत बन गए हैं. कई जगहों पर अवैध कारोबार और तस्करी भी बढ़ी है. 2024 में अफ्रीकी संघ ने गधे की खाल के व्यापार पर 15 साल का प्रतिबंध लगा दिया था. वहीं ब्राजील ने अप्रैल में गधों के वध पर रोक लगा दी.
वहीं, ब्राजील में गधों की आबादी 1996 में 13 लाख थी, जो 2025 तक घटकर सिर्फ 78 हजार रह गई. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि खेती में मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल ने भी इस गिरावट में भूमिका निभाई है. पशु कल्याण संगठनों ने चेतावनी दी है कि यह कारोबार बीमारियों के फैलने का भी बड़ा खतरा पैदा कर रहा है, क्योंकि कई जगह बिना निगरानी के जानवरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है.
लैब में बने उत्पाद को मिल सकता है समर्थन
जनवरी में चीन में किए गए एक सर्वे में पाया गया कि 46 प्रतिशत लोगों को यह तक पता नहीं था कि ‘एजियाओ’ गधे की खाल से बनती है. वहीं 76 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर लैब में बना विकल्प सस्ता और सुरक्षित हो तो वे उसे अपनाने के लिए तैयार हैं.
क्या सच में 150 साल जी सकता है इंसान?
चीन में लंबी उम्र की रिसर्च को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है. सरकार और निजी कंपनियां इसमें भारी पैसा लगा रही हैं. चीन वैज्ञानिकों का कहना है कि विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन 150 साल की उम्र अभी सपना ही लगता है. दुनिया भर में एंटी-एजिंग रिसर्च बढ़ रही है, लेकिन असली सफलता के लिए समय लगेगा. हालांकि, अभी कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो यह साबित कर सके कि कोई दवा इंसान की उम्र 150 साल तक बढ़ा सकती है. बता दें कि, लंबी उम्र के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली को ही सबसे प्रभावी माना जाता है.