Home > देश > महिला ने गले में डाली फूलों की माला और बूम! आखिर किसने करवाई थी Rajiv Gandhi की हत्या? मकसद सुन चौंक जाएंगे

महिला ने गले में डाली फूलों की माला और बूम! आखिर किसने करवाई थी Rajiv Gandhi की हत्या? मकसद सुन चौंक जाएंगे

How Rajiv Gandhi Was Killed: 21 मई का वो दिन जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था. 21 मई वो दिन है जो कांग्रेस के लिए सबसे काला दिन रहा. आपको बता दें कि आज राजीव गांधी का जन्मदिन है.

By: Heena Khan | Published: August 20, 2026 9:03:39 AM IST



How Rajiv Gandhi Was Killed: 21 मई का वो दिन जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था. 21 मई वो दिन है जो कांग्रेस के लिए सबसे काला दिन रहा. आपको बता दें कि आज राजीव गांधी का जन्मदिन है. आज के दिन हम आपको बताएंगे कि किस बेरहमी से राजीव गांधी की हत्या की गई थी? चलिए शुरू करते हैं उनके प्रधानमंत्री बनने के सफर से. जैसा की आप सभी जानते हैं कि इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही अंगरक्षकों ने कर दी थी;जिसके बाद राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली और राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह के सामने पद की शपथ ली. जब राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला तो राजीव सिर्फ 40 वर्ष के थे और वो भारत के युवा प्रधानमंत्री थे.  राजीव गांधी का केवल एक ही मकसद था कि कैसे भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए. 

क्या था LTTE ? 

इसी दौरान, यानी 1976 में, वेलुपिल्लई प्रभाकरण ने तमिल अलगाववादी संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम’ (LTTE) की स्थापना की. इस संगठन का मकसद श्रीलंका में एक अलग तमिल राज्य बनाना और तमिल लोगों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लड़ना था. बता दें कि LTTE को भारत सरकार का समर्थन और सहानुभूति हासिल थी; इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान, भारत की खुफिया एजेंसियों ने कुछ तमिल गुटों को ट्रेनिंग और मदद भी दी थी.

राजीव ने उठाया था बड़ा कदम 

जिसके बाद 1987 में भारत और श्रीलंका की सरकारों के बीच एक समझौता हुआ. जिसके चलते राजीव गांधी ने चल रहे संघर्ष और विवाद को खत्म करने और LTTE के हथियार ज़ब्त करने के मकसद से श्रीलंका में ‘इंडियन पीस कीपिंग फोर्स’ (IPKF) यानी भारतीय शांति सेना को तैनात किया. जिसके बाद शुरू में, LTTE ने भारतीय शांति सेना का स्वागत किया. लेकिन समय के साथ हालात बेहद खराब होते गए और LTTE राजीव गांधी के इस फैसले को दखलअंदाजी के तौर पर देखने लगी. इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना के खिलाफ हमला शुरू कर दिया एक ऐसा फैसला जिसके नतीजे आखिरकार LTTE को भुगतने पड़े.

Punjab: ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ का चौथा संस्करण 5 सितंबर से होगा शुरू, सीएम मान बोले- 10 लाख खिलाड़ी लेंगे हिस्सा

जब चुनाव प्रचार के लिए निकले राजीव

जैसे ही राजीव गाँधी ने श्रीलंका में शांति सेना की तैनाती की वैसे ही  LTTE के मन में नाराज़गी पैदा हो गई थी और वो राजीव गांधी के खिलाफ बुरी भावना रखने लगे थे. लेकिन 1989 में कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर हो गई, वहीं फिर वो एक अहम विपक्षी ताकत बनी रही. 1991 में, राजीव गांधी एक बार फिर चुनाव प्रचार के लिए निकले. इस दौरान, उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर वो सत्ता में लौटे, तो वो फिर से शांति सेना को श्रीलंका भेजेंगे. LTTE को अच्छी तरह पता था कि अगर राजीव गांधी दोबारा प्रधानमंत्री बने, तो वे श्रीलंका में शांति सेना को फिर से तैनात कर देंगे.

ऐसे हुई राजीव गांधी की हत्या 

जिसके बाद, LTTE का एक अलग मकसद शुरू हो गया. अब LTTE इस प्लानिंग में जुट गया था कि कैसे राजीव गाँधी को रास्ते  से हटाया जाए. यह कोई छोटी-मोटी योजना नहीं थी; हत्या की साज़िश बहुत बड़े पैमाने पर रची गई थी. 21 मई 1991 को, जब राजीव गांधी तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करने जा रहे थे, तब थेनमोझी “गायत्री” राजरत्नम नाम की एक महिला आत्मघाती हमलावर ने उन्हें माला पहनाने के बहाने उनके पास पहुँचकर एक विस्फोटक उपकरण में धमाका कर दिया. इस धमाके में राजीव गांधी समेत कुल 14 लोगों की मौत हो गई. गौरतलब है कि आत्मघाती हमलावर थेनमोझी, LTTE की सदस्य थी. राजीव गांधी को रैली में न जाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया. और वो चल पड़े जिसके बाद उनकी मौत हो गई. 

Gen Z से सीधे कनेक्ट करेगी मोदी सरकार, One Day, One University प्लान के तहत हर दिन केंद्रीय मंत्री विश्वविद्यालय पहुंचेंगे

Advertisement