दक्षिण और मध्य गुजरात में शुक्रवार (31 जुलाई, 2026) को भारी बारिश जारी रही, जिससे 5,100 से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना पड़ा. वहीं, बचाव अभियान भी शुरू करने पड़े और अधिकारियों को संवेदनशील जिलों में नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) और सेना की टीमों को तैनात करना पड़ा.
कई जिलों में हाई अलर्ट, अहमदाबाद में स्कूल बंद
इस बीच गुजरात में आगामी 2 अगस्त तक 13 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. भारी बारिश के मद्देनजर गुजरात के अहमदाबाद में रेड अलर्ट जारी करते हुए स्कूल कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. सूरत, वडोदरा, भावनगर, भरूच, आणंद, नर्मदा, तापी, डांग, छोटा उदयपुर, पंचमहल, दाहोद और महिसागर में भी हाई अलर्ट है.
सेना राहत अभियान के लिए तैयार
गांधीनगर में अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जयंती रवि ने सभी जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तैयारियों की समीक्षा की और सभी अफसरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. हर जिले में 24 घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहे हैं और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें तैनात कर दी गई हैं.
इन 13 ज़िलों में होगी बारिश
अहमदाबाद, बोटाद, भावनगर, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, नवसारी, छोटा उदेपुर, नर्मदा, तापी, डांग और वलसाड – को रेड अलर्ट पर रखा, जबकि सुरेंद्रनगर, राजकोट, अमरेली, गांधीनगर, खेड़ा, पंचमहल और दाहोद ऑरेंज अलर्ट पर रहे।
शुक्रवार दोपहर राज्य सरकार के जारी मीडिया बयान के अनुसार, 5,167 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। नवसारी में सबसे ज़्यादा 2,082 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया, इसके बाद तापी में 1,245 और सूरत में 1,221 लोगों को. वडोदरा में 329, नर्मदा में 178, आणंद में 112 और खेड़ा में 30 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया.
कई जिलों में जोरदार बारिश दर्ज
दक्षिण और मध्य गुजरात में सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच ज़ोरदार बारिश हुई। सूरत के उमरपाडा में सबसे ज़्यादा 203 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद खेड़ा के वासो में 162 मिमी, आनंद के बोरसद में 159 मिमी, खेड़ा के नडियाद में 151 मिमी और आनंद के खंभात में 147 मिमी बारिश हुई. नर्मदा के सागबारा और गरुड़ेश्वर में 144-144 मिमी बारिश हुई, जबकि आनंद और पेटलाद में 14-14 मिमी बारिश दर्ज की गई.
राज्य के 21 जलाशय अलर्ट पर
राज्य के 206 जलाशयों में से 21 हाई अलर्ट पर हैं. इनमें से 13 जलाशय अपनी पूरी क्षमता तक भर चुके हैं या उससे ज़्यादा भरे हुए हैं. 8 में पानी का स्तर 90% से 100% के बीच था.