Highway Monetisation Plan 2026: भारत में तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के बीच केंद्र सरकार अब नेशनल हाईवे से कमाई का नया मॉडल लेकर आई है. सरकार देशभर के कई तैयार और चालू नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को मोनेटाइज करने जा रही है, जिससे करीब ₹35,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. इस रकम का इस्तेमाल नए एक्सप्रेसवे, बेहतर सड़क नेटवर्क और मॉडर्न हाईवे सुविधाओं के निर्माण में किया जाएगा. खास बात ये है कि इससे सरकार को नए कर्ज का बोझ भी कम उठाना पड़ेगा और देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ्तार और तेज होगी.
क्या है हाईवे मोनेटाइजेशन?
हाईवे मोनेटाइजेशन का मतलब सड़कें बेचना नहीं है. सरकार केवल उन हाईवे प्रोजेक्ट्स को तय समय के लिए निजी कंपनियों को संचालन और रखरखाव के लिए सौंपती है, जहां पहले से टोल कलेक्शन हो रहा होता है. इसके बदले सरकार को एकमुश्त बड़ी रकम मिलती है, जबकि सड़क का मालिकाना हक सरकार के पास ही रहता है.
28 नेशनल हाईवे एसेट्स से जुटेंगे ₹35,000 करोड़
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश के 28 हाईवे स्ट्रेच को इस योजना के लिए चुना है. इन प्रोजेक्ट्स को ऑपरेट-मेंटेन-ट्रांसफर (OMT) और InVIT मॉडल के तहत मोनेटाइज किया जाएगा. सरकार का अनुमान है कि इससे लगभग ₹35,000 करोड़ की आय होगी, जिसे नए सड़क प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा.
सरकार इस पैसे का क्या करेगी?
मोनेटाइजेशन से मिलने वाली राशि का उपयोग नए एक्सप्रेसवे बनाने, ग्रामीण और दूरदराज इलाकों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने और पुराने हाईवे को अपग्रेड करने में किया जाएगा. इसके अलावा लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने और माल परिवहन को तेज बनाने पर भी फोकस रहेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा.
क्या टोल टैक्स बढ़ जाएगा?
अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि निजी कंपनियों के आने से टोल महंगा हो जाएगा. हालांकि टोल दरें सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार ही लागू होती हैं. निजी कंपनियां अपनी मर्जी से टोल नहीं बढ़ा सकतीं. वहीं बेहतर रखरखाव के कारण यात्रियों को गड्ढा-मुक्त सड़कें, बेहतर लाइटिंग, इमरजेंसी सेवाएं और आधुनिक हाईवे सुविधाएं मिलने की संभावना बढ़ जाती है.