Home > देश > जनरल विश्व नाथ शर्मा कौन थे? 1987 के पूर्व आर्मी चीफ जो चीन के खिलाफ डटे रहे; भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता से था कनेक्शन

जनरल विश्व नाथ शर्मा कौन थे? 1987 के पूर्व आर्मी चीफ जो चीन के खिलाफ डटे रहे; भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता से था कनेक्शन

General Vishwa Nath Sharma: 31 जुलाई 2026 को दिल्ली में जनरल विश्व नाथ शर्मा ने अंतिम सांस ली. वे 96 साल के थे, उनका अंतिम संस्कार कल यानी 1 अगस्त 2026 को सुबह दिल्ली कैंट स्थित ब्रार स्क्वायर श्मशान स्थल पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा.

By: Shristi S | Published: July 31, 2026 3:56:30 PM IST



General Vishwa nath Sharma Passed Away: भारत ने आज यानी 31 जुलाई 2026 को अपने एक ऐसे सैन्य हीरो को खो दिया, जिसने सिर्फ युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा के सबसे कठिन दौर में भी अद्भूत नेतृत्व का परिचय दिया. पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल विश्व नाथ शर्मा का 96 साल की उम्र में निधन हो गया.

वे वही सैन्य अधिकारी थे, जिन्होंने 1987 में भारत-चीन सीमा पर सुमदोरोंग चू के संकट दौरान पूर्वी कमान की जिम्मेदारी संभालत हुए भारतीय सेना को मजबूती से नेतृत्व दिया. इतना ही नहीं, वे स्वतंत्र भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के बड़े भाई भी थे. 

कौन थे जनरल विश्व नाथ शर्मा?

4 जून 1930 को जन्मे जनरल विश्व नाथ शर्मा भारतीय सेना के 14वें थलसेना प्रमुख थे. उन्होंने 1 मई 1988 से 30 जून 1990 तक भारतीय सेना की कमान संभाली. उनका सैन्य करियर लगभग चार दशक लंबा रहा और इस दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. एक खास उपलब्धि यह भी रही कि वे स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे अधिकारी बने, जिन्हें देश के राष्ट्रपति से कमीशन मिला और आगे चलकर वही अधिकारी सेना प्रमुख के सर्वोच्च पद तक पहुंचे. उन्हें 4 जून 1950 को 16वीं लाइट कैवेलरी में कमीशन मिला था.

1987 में चीन के सामने क्यों याद किए जाते हैं?

जनरल विश्व नाथ शर्मा का नाम 1987 के सुमदोरोंग चू सैन्य गतिरोध के कारण हमेशा याद किया जाएगा. उस समय वे भारतीय सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख थे. अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में चीन और भारत के बीच तनाव अपने चरम पर था. ऐसे संवेदनशील समय में उन्होंने भारतीय सेना की रणनीतिक तैनाती और तैयारी को मजबूत किया. उनकी सूझबूझ और दृढ़ नेतृत्व की वजह से भारत ने सीमा पर अपना मजबूत रुख बनाए रखा. इस घटना को भारत-चीन संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है और जनरल शर्मा की भूमिका उसमें बेहद अहम रही.

पाकिस्तान के खिलाफ भी दिखाया था साहस

जनरल विश्व नाथ शर्मा ने केवल चीन के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी सक्रिय भूमिका निभाई. उन्होंने लाहौर सेक्टर में दुश्मन के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया. अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने 66वीं आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान संभाली. बाद में उग्रवादी प्रभावित क्षेत्रों में एक माउंटेन ब्रिगेड का नेतृत्व भी किया. उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया.

जनरल विश्व नाथ शर्मा का पूरा परिवार था सेना को समर्पित

जनरल विश्व नाथ शर्मा ऐसे परिवार से आते थे, जहां देशसेवा एक परंपरा थी. उनके पिता मेजर जनरल अमरनाथ शर्मा भारतीय सेना में वरिष्ठ अधिकारी रहे. उनके छोटे भाई मेजर सोम नाथ शर्मा स्वतंत्र भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता बने, जिन्होंने 1947-48 के भारत-पाक युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया. उनके दूसरे भाई जनरल सुरिंद्र नाथ शर्मा भारतीय सेना में इंजीनियर-इन-चीफ रहे, जबकि उनकी बहन मेजर डॉ. कमला तिवारी सेना की मेडिकल कोर में अधिकारी थीं.

कल होगा अंतिम संस्कार

31 जुलाई 2026 को दिल्ली में जनरल विश्व नाथ शर्मा ने अंतिम सांस ली. वे 96 साल के थे, उनके निधन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मौजूदा सेना प्रमुख और देशभर के सैन्य अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्ति किया. उनका अंतिम संस्कार कल यानी 1 अगस्त 2026 को सुबह दिल्ली कैंट स्थित ब्रार स्क्वायर श्मशान स्थल पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा.

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