Home > देश > संसद मार्च के दौरान किसके आदेश पर की गई फायरिंग? सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के दिए निर्देश

संसद मार्च के दौरान किसके आदेश पर की गई फायरिंग? सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के दिए निर्देश

Delhi CJP Protest: दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शन में संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी, ड्रोन, बॉडी कैमरा, वायरलेस और PCR रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया है.

By: Sohail Rahman | Published: July 28, 2026 2:59:41 PM IST



Supreme Court: दिल्ली पुलिस के डीसीपी रैंक के अधिकारी के आदेश पर आरएएफ ने 2 बार एंटी रायट गन का इस्तेमाल किया. दिल्ली के संसद मार्ग थाने में दर्ज डायरी एंट्री से हकीकत सामने आई है. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए हिंसक प्रदर्शन के दिन तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने दिल्ली पुलिस के एक डीसीपी रैंक के अधिकारी के निर्देश पर दो बार एंटी-रायट गन (ARG) का इस्तेमाल किया था.

सूत्रों की मानें तो डॉक्यूमेंट में यह भी दर्ज है कि इस कार्रवाई की आधिकारिक एंट्री भी की गई थी, दस्तावेज की मानें तो जंतर-मंतर के जोन-1 में तैनात RAF की एक कंपनी दिल्ली पुलिस के डीसीपी रैंक के अधिकारी के साथ भीड़ को नियंत्रित करने का काम कर रही थी.

कितने राउंड फायर किए गए?

इसी दौरान डीसीपी के कहने पर RAF जवानों ने 55 नॉन-इलेक्ट्रिक शेल, 15 इलेक्ट्रिक शेल, 5 टियर स्मोक ग्रेनेड और एंटी-रायट गन से दो राउंड फायर किए. सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आ रही है कि इस राउंड में प्लास्टिक पैलेट वाले बैलिस्टिक कारतूस इस्तेमाल किए गए थे. इसमें कम से कम 4 लोग घायल हुए हैं. एंटी-रायट गन को कम घातक (Less-Lethal) भीड़ नियंत्रण हथियार माना जाता है. यह पारंपरिक पैलेट गन से अलग होती है, लेकिन इसी श्रेणी के हथियारों में शामिल है.

यह भी पढ़ें – पति बना हैवान, पत्नी और 6 बच्चों को आखिर क्यों मार डाला; रहस्य सुलझाने में जुटी पुलिस

हिंसा के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के लगे थे आरोप

इसमें प्लास्टिक पैलेट वाले कारतूस लगाए जाते हैं, फायर होने पर एक कारतूस कई टुकड़ों में बंट जाता है और एक साथ कई लोगों को लग सकता है, इसका मकसद भीड़ को तितर-बितर करना होता है, न कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना. जंतर-मंतर हिंसा के बाद सुरक्षा बलों पर पैलेट गन इस्तेमाल करने के आरोप लगे थे. शुरुआती दौर में ऐसे आरोपों से इनकार किया गया था. इससे पहले भी RAF के भीतर इस पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू की जा चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी, ड्रोन, बॉडी कैमरा, वायरलेस और PCR रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी. कोर्ट ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले मामलों को छोड़कर प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार सभी नाबालिग प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया.

सीजेआई सूर्यकांत ने क्या कहा?

भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं, जिसमें घायल 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के परिवारों की चिंताओं का भी ध्यान रखा जाए. इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्यों से जवाब मिलने के बाद स्वतंत्र जांच समिति के गठन पर विचार किया जाएगा.

यह भी पढ़ें – पत्नी पर शक, सड़क पर विवाद और अगले दिन इस हालत में मिला पति, इटावा की घटना ने हर किसी को किया हैरान

Advertisement