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चुनावी रण से पहले सीएम विजय पर बड़ा कानूनी वार, बच्चों को ‘ब्लैकमेल’ करने के आरोप ने बढ़ाई मुश्किलें

Chief Minister Vijay Legal Challenge: इस साल मुख्यमंत्री की दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से जीत को चुनौती देने वाली अलग-अलग चुनावी याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने एक जैसी दलीलें दीं. उन्होंने कहा 'पहले प्रतिवादी (श्री विजय) ने वोट हासिल करने के लिए अपने भाषणों के जरिए कमजोर बच्चों और आसानी से प्रभावित होने वाले लोगों को भावनात्मक रूप से निशाना बनाया और कुछ हद तक उन्हें ब्लैकमेल भी किया जिससे उन्हें उन लोगों के परिवार वालों के वोट भी मिल गए.

By: Anshika thakur | Published: July 8, 2026 3:56:56 PM IST



Chief Minister Vijay Legal Challenge: DMK के चुनाव याचिकाकर्ता R.D. सेकर और S. इनिगो इरुदयाराज ने मद्रास हाई कोर्ट में तर्क दिया है कि मुख्यमंत्री C. जोसेफ विजय ने बच्चों से अपील करके उन्हें ‘ब्लैकमेल’ किया. उन्होंने बच्चों से कहा था कि वे अपने परिवारों के बड़ों को उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) को वोट देने के लिए मनाएं. सेकर और इरुदयाराज लगभग पेरंबूर और त्रिची ईस्ट विधानसभा क्षेत्रों में विजय से चुनाव हार गए थे.

इस साल मुख्यमंत्री की दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से जीत को चुनौती देने वाली अलग-अलग चुनावी याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने एक जैसी दलीलें दीं. उन्होंने कहा ‘पहले प्रतिवादी (श्री विजय) ने वोट हासिल करने के लिए अपने भाषणों के जरिए कमजोर बच्चों और आसानी से प्रभावित होने वाले लोगों को भावनात्मक रूप से निशाना बनाया और कुछ हद तक उन्हें ब्लैकमेल भी किया जिससे उन्हें उन लोगों के परिवार वालों के वोट भी मिल गए.’

उन्होंने कोर्ट में एक DVD जमा की जिसमें 21 अप्रैल 2026 को चेन्नई के YMCA ग्राउंड में चुनाव प्रचार के आखिरी भाषण के दौरान मुख्यमंत्री की अपील का वीडियो क्लिप था. उन्होंने कहा बच्चों से इस तरह की भावुक अपील करना और उन्हें चुनावी गतिविधियों में शामिल करना न केवल अनैतिक है बल्कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और संविधान की भावना के भी खिलाफ है.

मंगलवार (7 जुलाई 2026) को जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायण ने दोनों चुनावी याचिकाओं के संबंध में मुख्यमंत्री को नोटिस जारी करने का आदेश दिया. उन्होंने याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर वकील पी. विल्सन द्वारा पेश की गई शुरुआती दलीलें सुनीं. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रचार गतिविधियों में बच्चों को शामिल किया गया था. खासकर उनके गले में TVK मफलर बांधे गए थे और उनसे पैम्फलेट, पोस्टर और हैंडबिल पकड़वाए गए थे.

चुनाव प्रचार या रैलियों में बच्चों के इस्तेमाल के खिलाफ भारत के चुनाव आयोग (ECI) के 5 फरवरी 2024 के निर्देश का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि “पहले प्रतिवादी द्वारा चुनाव प्रचार गतिविधियों में बच्चों को व्यवस्थित रूप से शामिल करना” उस निर्देश का उल्लंघन था. इसलिए आयोग के निर्देशों के कथित उल्लंघन के कारण अदालत को उनकी जीत को अमान्य घोषित कर देना चाहिए.

खर्च, शपथ-पत्र और चुनाव आचार संहिता से जुड़े सवाल

चुनाव से जुड़ी दो याचिकाओं में उठाए गए अन्य मुद्दों में शामिल थे चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा न दे पाना, चुनावी हलफनामों में बताई गई संपत्ति और देनदारियों की जानकारी में विसंगतियां, और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए धार्मिक स्थलों पर चुनाव प्रचार करना.

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि म्यूजिक कंपोजर एस. थमन ने TVK का फ्लैग एंथम, कैंपेन एंथम और विसल एंथम तैयार किया था‌ जिनका प्रचार-प्रसार के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया लेकिन इनके लिए हुए खर्च का कोई ब्योरा नहीं दिया गया. उन्होंने दावा किया कि कंपोजर ने अपनी सेवाओं के लिए निश्चित रूप से कम से कम ₹10 लाख लिए होंगे और आरोप लगाया कि चुनाव से जुड़े इस खर्च को छिपाया गया था.

याचिकाकर्ताओं ने कहा‌‌ की‌ भारत निर्वाचन आयोग द्वारा तय ₹40 लाख की सीमा से ज़्यादा खर्च करना ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 77(3) का उल्लंघन है और साथ ही यह ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 123(6) के तहत भ्रष्ट आचरण भी माना जाता है. उन्होंने दावा किया कि इतने ज्यादा खर्च से दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में उनके चुनाव जीतने की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा.

कोर्ट को यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे के पार्ट A में अलग-अलग फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹3.44 करोड़ का बकाया इनकम टैक्स बताया था फिर भी उसी हलफनामे के पार्ट B में उन्होंने दावा किया कि सरकार को उनका कोई बकाया नहीं देना है.

याचिकाकर्ताओं ने कहा यह जरूरी जानकारी छिपाने जैसा है क्योंकि हलफनामे का पार्ट B एक समरी की तरह होता है जिसे रिटर्निंग ऑफिसर अपने ऑफिस और वेबसाइट के जरिए वोटरों को दिखाते हैं. इसे पढ़ने वाला कोई वोटर यह सोच सकता है कि पहले रेस्पोंडेंट पर सरकार का कोई बकाया नहीं है.

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने 19 अप्रैल 2026 को सेंट एंथनी चर्च के अंदर एक कैंपेन इवेंट आयोजित किया था और तर्क दिया कि पहले रेस्पोंडेंट के इस काम को निजी प्रार्थना नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उन्होंने TVK पार्टी के रंगों वाला मफलर पहना हुआ था और चर्च के बाहर मीडिया और अपने समर्थकों को इकट्ठा किया था.

याचिकाकर्ता क्या चाहते हैं और सीटों की संख्या

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मिस्टर विजय द्वारा लड़ी गई दोनों सीटों के चुनाव नतीजों को रद्द करने और उन्हें विजेता घोषित करने की अपील की. चूंकि मुख्यमंत्री ने तिरुचि ईस्ट सीट से इस्तीफा दे दिया था, इसलिए मिस्टर इरुदयाराज ने अपनी चुनावी याचिका के निपटारे तक ECI को उस सीट पर उपचुनाव कराने से रोकने के लिए एक अंतरिम आदेश की भी मांग की.

चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के अलावा पेरंबूर सीट के दो वोटरों एस. दिनेश और टी.एन. लक्ष्मी नरसिम्हन ने भी मुख्यमंत्री की जीत को चुनौती देते हुए अलग-अलग चुनावी याचिकाएं दायर की थीं और जज ने उन याचिकाओं के संबंध में भी नोटिस जारी करने का आदेश दिया. मिस्टर विजय को मिस्टर शेखर के 53,715 वोटों के मुकाबले 1,20,365 वोट मिले जिससे उन्होंने 53,715 वोटों के अंतर से पेरंबूर सीट जीती.

इसी तरह उन्हें मिस्टर इरुदयाराज के 63,965 वोटों के मुकाबले 91,381 वोट मिले उन्होंने 27,416 वोटों के अंतर से तिरुचि ईस्ट सीट जीती. बाद में उन्होंने तिरुचि ईस्ट विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया और पेरंबूर सीट अपने पास रखी.

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