Chardham Yatra postponed: उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन और चारधाम यात्रा दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. जगह-जगह भूस्खलन, हाईवे बंद होने, नदियों का जलस्तर बढ़ने और नए खतरे वाले क्षेत्रों के उभरने के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर चारधाम यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है. गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है, जबकि कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान भी चलाना पड़ा.
बारिश का डबल अटैक
उत्तराखंड में मानसून का असर लगातार तेज होता जा रहा है. भारी बारिश के चलते राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने, पुल क्षतिग्रस्त होने और नदियों का जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाएं सामने आई हैं. हालात को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चारधाम यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है. गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप ने बताया कि चारधाम यात्रा मार्गों पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है और मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया गया है.
बदरीनाथ हाईवे पर भूस्खलन
बदरीनाथ धाम से करीब चार किलोमीटर पहले कंचनगंगा क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिरने के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है. सड़क बंद होने से यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है. प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियां मार्ग को जल्द खोलने के प्रयास में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्य में चुनौती बनी हुई है.
रुद्रप्रयाग में तीन महिलाओं का सफल रेस्क्यू
रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तीन महिलाएं नदी के बीच फंस गईं. जानकारी के अनुसार, तिलवाड़ा-सुमाड़ी पुल के नीचे तीनों महिलाएं लकड़ियां इकट्ठा करने गई थीं. इसी दौरान नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और वे बीच में ही फंस गईं. सूचना मिलते ही जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र ने एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और जल पुलिस की टीमों को मौके पर भेजा. संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर तीनों महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने की अपील की है.
गंगा खतरे के निशान के करीब
हरिद्वार में भी गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. भीमगोड़ा बैराज पर सुबह 11 बजे गंगा का जलस्तर 292.70 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 293 मीटर से महज 0.30 मीटर नीचे है. गंगा का खतरे का निशान 294 मीटर निर्धारित है. ऊपरी क्षेत्रों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर बढ़ रहा है. इस मानसून सीजन में अब तक का सबसे अधिक जलस्तर रिकॉर्ड किया गया है. बढ़ते दबाव को देखते हुए भीमगोड़ा बैराज के अतिरिक्त गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
देहरादून में नया पुल ढहा
लगातार बारिश के कारण देहरादून में एक नवनिर्मित पुल ढह गया है. वहीं, मसूरी रोड पर भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित हुआ है. प्रशासन की टीमें सड़क से मलबा हटाने और यातायात सामान्य करने में जुटी हुई हैं. यमुनोत्री हाईवे पर बना नया डेंजर जोन, हर बारिश में रुक जाता है ट्रैफिक दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग-507 पर मोई झरने के आगे एक नया संवेदनशील क्षेत्र उभरकर सामने आया है. यहां बारिश होते ही पहाड़ी से मलबा सड़क पर आ जाता है और कुछ ही समय में वह दलदल में बदल जाता है. इससे वाहन फंस जाते हैं और कई घंटों तक यातायात ठप रहता है. रात के समय स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि ऊपर से लगातार पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है. ऐसे में मशीनें लगाने और मलबा हटाने का कार्य भी जोखिम भरा हो जाता है.
किसानों और मरीजों पर भी पड़ रहा असर
राष्ट्रीय राजमार्ग बार-बार बंद होने से चकराता, मसूरी, यमुना घाटी और यमुनोत्री जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. किसानों की फसलें समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है. कई बार रात के समय मरीज और एंबुलेंस भी सड़क बंद होने के कारण फंस जाते हैं. एनएच देहरादून के अधिशासी अभियंता सुरेश तोमर ने बताया कि मार्ग पर मलबा आने की स्थिति से निपटने के लिए दो जेसीबी मशीनें हर समय तैनात रखी गई हैं. बारिश रुकते ही सड़क खोलने का प्रयास किया जाता है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण चुनौती बनी रहती है.
यात्रियों और स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें. चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु केवल प्रशासन और मौसम विभाग के ताजा अपडेट के आधार पर ही आगे की योजना बनाएं. संवेदनशील इलाकों में पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य राहत एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है.