Home > देश > Brishti Mukherjee: ममता बनर्जी के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, घर के कमरे में फंदे से लटकी मिली भतीजी

Brishti Mukherjee: ममता बनर्जी के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, घर के कमरे में फंदे से लटकी मिली भतीजी

Brishti Mukherjee Death: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी को ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बनर्जी की भतीजी ब्रिष्टि मुखर्जी  मंगलवार 1 सितंबर 2026 को अपने बीरभूम के कुसुम्बा गांव में घर के एक कमरे में लटकी हुई मिलीं.

By: Shristi S | Last Updated: September 1, 2026 4:03:10 PM IST



Brishti Mukherjee Death: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी को ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बनर्जी की भतीजी ब्रिष्टि मुखर्जी  मंगलवार 1 सितंबर 2026 को अपने बीरभूम के कुसुम्बा गांव में घर के एक कमरे में लटकी हुई मिलीं. पुलिस मौके पर पहुंची, बॉडी को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की. पहली नजर में, मामला खुदकुशी का लग रहा है.

हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी ऑफिशियली पुष्टि नहीं की है. पुलिस घटना का कारण पता लगाने के लिए परिवार के सदस्यों और आस-पास के लोगों से पूछताछ कर रही है, और दूसरी बातों की भी जांच कर रही है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है.

कौन थी ब्रिष्टि मुखर्जी?

ममता बनर्जी के चचेर भाई और तृणमूल नेता निहार मुखर्जी की बेटी थीं, ब्रिष्टि मुखर्जी. 28 वर्षीय ब्रिष्टि पिछले चार-पांच सालों से मेंटल डिप्रेशन से जूझ रही थी, वहीं दूसरी तरफ कोर्ट में उनके तलाक की कार्रवाई हाल ही में शुरू हुई थी.

मामले पर क्या है परिवार का दावा?

परिवार का दावा है कि लड़की ने डिप्रेशन की वजह से अपनी जान दे दी; पुलिस भी यही शुरुआती अंदाज़ा लगा रही है. अननैचुरल डेथ का केस रजिस्टर कर लिया गया है, और जांच चल रही है. परिवार वालों से शुरुआती पूछताछ हो चुकी है. ब्रिष्टि से जुड़े तलाक की कार्रवाई हाल ही में कोर्ट में शुरू हुई थी. उसके करीबी लोगों ने बताया कि वह अपनी पर्सनल और फैमिली लाइफ दोनों में काफी उथल-पुथल से जूझ रही थी. वह पिछले चार-पांच सालों से मेंटल डिप्रेशन से जूझ रही थी, डॉक्टरों से सलाह ले रही थी, और दवा ले रही थी.

शिक्षक भर्ती घोटाले में गई थी ब्रिष्टि की नौकरी

परिवार वालों का कहना है कि ब्रिष्टि मुखर्जी लंबे समय से डिप्रेशन से जूझ रही थीं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिन लोगों की नौकरी चली गई, उनमें वह भी शामिल थीं. वह राज्य के बोलपुर अपर प्राइमरी स्कूल में नॉन-टीचिंग स्टाफ मेंबर के तौर पर काम कर रही थीं. मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के सहायता प्राप्त स्कूलों में टीचरों की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं. यह कार्रवाई कैश-फॉर-जॉब मामले में की गई थी. इसके बाद करीब 26,000 टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया गया था.

कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुरू में इन 26,000 टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया था. बाद में जब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, तो सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा. गौरतलब है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद जिन लोगों की नौकरियां खत्म की गईं, उनकी लिस्ट में ब्रिष्टि का नाम 608वें नंबर पर था.

Advertisement