Home > देश > अब जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनाना होगा मुश्किल, संसद में पास हुआ बिल; जानिए क्या है नए और सख्त नियम

अब जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनाना होगा मुश्किल, संसद में पास हुआ बिल; जानिए क्या है नए और सख्त नियम

Birth and Death Registrations Bill 2026: संसद से पास हुआ नया जन्म-मृत्यु पंजीकरण बिल! अब देरी से बर्थ या डेथ सर्टिफिकेट बनवाने पर नियम और सख्त हो गए हैं. जानिए 1 से 2 साल और 2 साल से अधिक की देरी पर क्या प्रक्रिया होगी और किसके आदेश की जरूरत पड़ेगी.

By: Shivani Singh | Published: August 4, 2026 9:04:19 PM IST



लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक’ को अपनी मंज़ूरी दे दी है. यह विधेयक ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969’ में संशोधन करने के उद्देश्य से लाया गया है. सदन की कार्यवाही के दौरान जब विपक्ष के हंगामे के बीच गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस बिल को पेश किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मुख्य मकसद धारा 13(3) में बदलाव करके विलंबित (देरी से होने वाले) पंजीकरण के नियमों को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाना है.

सरकार का उद्देश्य देश में जन्म और मृत्यु के सही समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना और फर्जी या गलत जानकारी के आधार पर होने वाले रजिस्ट्रेशन पर लगाम कसना है.

क्या बदले नियम? जानिए प्रमुख प्रावधान

इस संशोधन के ज़रिए देरी से किए जाने वाले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को दो अलग-अलग हिस्सों में बाँटा गया है:

1 से 2 साल की देरी पर

यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के 1 वर्ष के बाद लेकिन 2 वर्ष के भीतर दी जाती है, तो इसका पंजीकरण केवल ज़िला मजिस्ट्रेट (DM), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) की अनुमति के बाद ही हो सकेगा.

2 साल से अधिक की देरी पर

यदि घटना को हुए 2 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो अब प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है.

सत्यापन प्रक्रिया 

दोनों ही मामलों में सक्षम प्राधिकारी दी गई जानकारी की गहनता से जाँच और सत्यापन करेंगे. संतुष्ट होने के बाद ही पंजीकरण की अनुमति दी जाएगी.

संसद में हंगामे के बीच पारित हुआ बिल

लोकसभा की मंज़ूरी: लोकसभा में यह बिल पहले ही पारित हो चुका था. वहाँ विपक्ष ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह को खुद सदन में मौजूद रहना चाहिए.

राज्यसभा में विपक्ष के शोर-शराबे और संक्षिप्त चर्चा के बाद, गृह राज्य मंत्री के जवाब के साथ ही बिल को ध्वनि मत (Voice Vote) से पारित कर दिया गया.

Advertisement