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POSCO एक्ट में नाबालिग से कांड पर 20 साल की सजा

ओडिशा के ढेंकानाल जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 20 हजार का जुर्माना भी लगाया है

By: Thakur Dinesh Kumar | Last Updated: July 16, 2026 2:09:42 PM IST



Odisha News: ओडिशा के ढेंकानाल जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 20 हजार का जुर्माना भी लगाया है. 

जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उसे अतिरिक्त छह महीने का कठोर कारावास भुगतना होगा. इस फैसले को बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त न्यायिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है.

साक्ष्यों, गवाहों के बयान, जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी

यह फैसला ढेंकानाल के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष POCSO न्यायालय ने परजंग थाना कांड संख्या 77/2019 की सुनवाई पूरी होने के बाद सुनाया। मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(3) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत दर्ज किया गया था. अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया.

आरोपी की पहचान

आरोपी की पहचान सागर बारिक (19) के रूप में हुई है, जो ढेंकानाल जिले के परजंग थाना क्षेत्र के माणिकमरा गांव का निवासी है. पुलिस के अनुसार, वर्ष 2019 में नाबालिग पीड़िता के परिजनों ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत मिलने के बाद 25 मार्च 2019 को परजंग थाना में मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई.

आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास 

अदालत ने अपने आदेश में आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ-साथ 20 हजार का आर्थिक दंड भी लगाया. यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त छह महीने का कठोर कारावास भुगतना होगा.

इस मामले की जांच तत्कालीन उपनिरीक्षक (SI) सस्मिता पाल ने की थी। वहीं, अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष POCSO लोक अभियोजक स्मिता पटनायक ने प्रभावी ढंग से पैरवी की. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मजबूत जांच और साक्ष्यों के कारण अदालत में अभियोजन पक्ष अपना मामला सफलतापूर्वक साबित कर सका.

मामला वर्ष 2019 का है

यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज हुआ था, इसलिए इसकी सुनवाई उस समय लागू भारतीय दंड संहिता (IPC) और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत की गई. वर्तमान में इसी प्रकार के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधान लागू होते हैं, जबकि बच्चों से जुड़े यौन अपराधों में पॉक्सो अधिनियम की धाराएं भी समान रूप से प्रभावी रहती हैं.

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