Home > हिमाचल प्रदेश > हिमाचल के मंदिरों में ढाई साल में चढ़ावे के सारे रिकॉर्ड टूटे: जानिए टॉप-10 की लिस्ट में कौन सा मंदिर है सबसे आगे और कहां खर्च होता है यह पैसा?

हिमाचल के मंदिरों में ढाई साल में चढ़ावे के सारे रिकॉर्ड टूटे: जानिए टॉप-10 की लिस्ट में कौन सा मंदिर है सबसे आगे और कहां खर्च होता है यह पैसा?

Himachal Temples Donations: हिमाचल प्रदेश के 36 सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में जनवरी 2024 से अगस्त 2026 के बीच कुल ₹419.88 करोड़ का चढ़ावा आया है. इस मामले में हिमाचल प्रदेश विधानसभा में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आधिकारिक जानकारी साझा की. यहां जानिए किन मंदिरों को सबसे ज्यादा चढ़ावा मिला और पिछले 2 साल में चढ़ावे की कितनी राशि प्राप्त हुई.

By: Kajal Jain | Published: August 23, 2026 9:44:23 AM IST



Himachal Temples Donations: हिमाचल प्रदेश के मंदिरों में आने वाले चढ़ावे को लेकर हाल ही में विधानसभा में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे वाकई चौंकाने वाले और दिलचस्प हैं. राज्य सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले ढाई-तीन सालों (यानी 1 जनवरी 2024 से 1 अगस्त 2026 के बीच) में प्रदेश के 36 सरकारी नियंत्रण वाले हिंदू मंदिरों और ट्रस्टों को कुल 419.88 करोड़ रुपये का भारी-भरकम दान मिला है. साल दर साल बात करें तो साल 2024 में कुल 153.32 करोड़, साल 2025 में बढ़कर 157.51 करोड़ और साल 2026 में 1 अगस्त तक 109.4 करोड़ रुपये का चढ़ावा इन मंदिरों में आया है. इन पैसों का इस्तेमाल मंदिरों के रखरखाव, तीर्थयात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं, पीने के पानी, बिजली, सुरक्षा, सफाई, लंगर और गौशालाओं जैसी कई जरूरी गतिविधियों के लिए किया जाता है. हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत इन पैसों को आपदा राहत कार्यों में इस्तेमाल करने का कोई प्रावधान नहीं है और सरकार का फिलहाल ऐसा कोई नियम बदलने का विचार भी नहीं है. आइए जानते हैं कि कौन सा मंदिर इस लिस्ट में सबसे आगे है और इन पैसों का पूरा हिसाब-किताब कैसे रखा जाता है.

सबसे अमीर मंदिर और चढ़ावे की पूरी लिस्ट

विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा दान हमीरपुर के दियोसिद्ध स्थित श्री बाबा बालक नाथ मंदिर को मिला है, जहां इस दौरान 99.19 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा चढ़ावा आया. इसके बाद बिलासपुर का श्री नैना देवी मंदिर 86.94 करोड़ रुपये के साथ दूसरे नंबर पर और ऊना का माता चिंतपूर्णी मंदिर 85.72 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा.

  • बाबा बालक नाथ मंदिर (दियोटसिद्ध, हमीरपुर): ₹99.19 करोड़ (सूची में पहले स्थान पर)
  • माता नैना देवी मंदिर (बिलासपुर): ₹86.94 करोड़
  • माता चिंतपूर्णी मंदिर (ऊना): ₹85.72 करोड़
  • माता ज्वालामुखी मंदिर (कांगड़ा): ₹36.57 करोड़
  • महामाया बाला सुंदरी मंदिर (त्रिलोकपुर, सिरमौर): ₹26.99 करोड़
  • बाबा बालकनाथ मंदिर समूह (शाहतलाई, बिलासपुर): ₹14.10 करोड़
  • बज्रेश्वरी देवी मंदिर (कांगड़ा): ₹13.76 करोड़
  • चामुंडा नंदिकेश्वर मंदिर (कांगड़ा): ₹11.68 करोड़
  • जाखू हनुमान मंदिर (शिमला): ₹8.82 करोड़
  • तारादेवी मंदिर (शिमला): ₹5.00 करोड़ से अधिक

पैसों का इस्तेमाल कहां और कैसे होता है?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि मंदिरों में आने वाले इन पैसों का इस्तेमाल ‘हिमाचल प्रदेश हिंदू पब्लिक रिलीजियस इंस्टीट्यूशंस एंड चैरिटेबल एंडोमेंट्स एक्ट, 1984’ के नियमों के तहत किया जाता है. 

  1. इस बजट से तीर्थ केंद्रों का विकास, श्रद्धालुओं के लिए टॉयलेट, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाती है.
  2. मंदिरों की साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण, रख-रखाव, लंगर सेवा और धार्मिक अनुष्ठानों व मेलों का आयोजन इसी से होता है.
  3. इसमें पुजारियों और मंदिर के अन्य कर्मचारियों का वेतन भी शामिल है.
  4. मंदिर की आय का 15 प्रतिशत हिस्सा गौशालाओं के निर्माण, रखरखाव और गौ संरक्षण के लिए अलग से तय किया गया है.

आपदा राहत को लेकर सरकार की स्थिति

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में साफ किया कि मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत मंदिर के पैसों का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई या राहत कार्यों के लिए किया जा सके. सरकार का फिलहाल ऐसा कोई विचार नहीं है कि नियमों में बदलाव करके इन पैसों को आपदा राहत में खर्च करने की अनुमति दी जाए.

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