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Himachal Pradesh News: शादी-ब्याह में बैंड सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि पूरे समारोह की रौनक होता है. लेकिन हिमाचल प्रदेश के एक परिवार की खुशियां उस वक्त परेशानी में बदल गईं, जब बेटे की शादी के दिन पहले से बुक किया गया बैंड समय पर नहीं पहुंचा. हालात ऐसे बने कि बारात घंटों तक रुकी रही और आखिर में परिवार को मजबूरी में दूसरा बैंड बुलाना पड़ा. मामला कंज्यूमर आयोग तक पहुंचा, जहां परिवार को इंसाफ मिला.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांगड़ा जिले के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपने बेटे की शादी के लिए करीब एक महीने पहले पांच सदस्यीय ब्रास बैंड बुक कराया था. बैंड संचालक से 9 हजार रुपये में सौदा तय हुआ और बुकिंग पक्की करने के लिए 4,200 रुपये एडवांस भी दिए गए थे. परिवार को भरोसा था कि शादी वाले दिन सारी व्यवस्था तय समय पर होगी.
बारात तैयार थी, लेकिन बैंड का नहीं मिला कोई पता
शादी वाले दिन बारात निकलने का समय हो गया, लेकिन बैंड मौके पर नहीं पहुंचा. परिवार ने कई बार बैंड संचालक को फोन किया. शुरुआत में उसने भरोसा दिलाया कि वह रास्ते में है और जल्द पहुंच जाएगा. लेकिन समय बीतता गया. बाद में उसका मोबाइल बंद हो गया. मजबूरी में परिवार ने तुरंत दूसरा बैंड बुलाया, जिसके लिए उन्हें 10 हजार रुपये खर्च करने पड़े.
परिवार ने कंज्यूमर आयोग में की शिकायत
शादी के बाद परिवार ने इसे हल्के में नहीं लिया. उनका कहना था कि एडवांस लेने के बावजूद बैंड उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा. इसके बाद उन्होंने कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (Consumer Commission) में शिकायत दर्ज कराई.
बैंड संचालक ने नहीं रखा अपना पक्ष
आयोग ने मामले में बैंड संचालक को कई बार नोटिस भेजे, लेकिन वह न तो सुनवाई में शामिल हुआ और न ही कोई जवाब दिया. ऐसे में आयोग ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर एकतरफा सुनवाई जारी रखी.आयोग ने माना कि एडवांस लेने के बाद तय सेवा उपलब्ध नहीं कराना स्पष्ट रूप से ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का मामला है.
39 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश
सुनवाई पूरी होने के बाद आयोग ने बैंड संचालक को शिकायतकर्ता को कुल 39 हजार रुपये देने का आदेश दिया. इसमें-
- 14 हजार रुपये आर्थिक नुकसान की भरपाई,
- 15 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और असुविधा का मुआवजा,
- 10 हजार रुपये मुकदमे का खर्च शामिल है.
आयोग ने यह भी कहा कि शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान होने तक इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सीख?
यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो शादी या किसी बड़े आयोजन के लिए पहले से सेवाएं बुक कराते हैं. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी सेवा की बुकिंग करते समय रसीद, एडवांस भुगतान और लिखित समझौते जैसे सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें. यदि तय सेवा समय पर नहीं मिलती और उससे नुकसान होता है, तो उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर कानूनी राहत ली जा सकती है.