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युवाओं का दिल क्यों पड़ रहा कमजोर? हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है ये संकेत, डॉक्टर ने बताए इसके पीछे छिपे जोखिम

Heart Attack in Young Adults: कभी हार्ट अटैक को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आजकल कम उम्र में ही दिल कमजोर पड़ जा रहा है. कई बार हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या ब्लड शुगर जैसी स्थितियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर, कम उम्र में क्यों बढ़ रहा हार्ट रिस्क? किन लक्षणों पर रखें नजर?

By: Lalit Kumar | Published: October 1, 2026 1:54:51 PM IST



Heart Attack in Young Adults: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल तमाम गंभीर बीमारियों की वजह बन रही है. इनमें हार्ट से जुड़ी बीमारियां टॉप पर हैं. इसी का नतीजा है कि, आज दुनियाभर में हार्ट से जुड़ी बीमारियों से पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है. कभी हार्ट अटैक को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आजकल कम उम्र में ही दिल कमजोर पड़ जा रहा है. कई बार हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या ब्लड शुगर जैसी स्थितियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा और परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास हार्ट अटैक के जोखिम से जुड़े मुख्य कारक हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर, कम उम्र में क्यों बढ़ रहा हार्ट रिस्क? किन लक्षणों पर रखें नजर? आइए जानते हैं इससे जुड़ी जरूरी बातें- 

कम उम्र में क्यों बढ़ रहा हार्ट रिस्क?

PSRI Hospital, नई दिल्ली के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. योगेश ओम शर्मा न्यूज 9 को बताते हैं कि, उम्र को अब हार्ट अटैक से बचाव की गारंटी नहीं माना जा सकता है. लंबे समय तक बैठे रहना, एक्सरसाइज की कमी, खराब नींद, तनाव, स्मोकिंग, शराब और प्रोसेस्ड फूड से भरपूर डाइट जैसे कारक समय के साथ कार्डियोवैस्कुलर जोखिम बढ़ा सकते हैं. हार्ट की धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित हो सकती है और शुरुआत में इसका कोई स्पष्ट संकेत भी नहीं मिलता है.

BP, कोलेस्ट्रॉल और शुगर पर रखें नजर

युवाओं में एक बड़ी समस्या यह भी है कि, वे खुद को स्वस्थ मानकर प्रॉपर हेल्थ चेकअप को टाल देते हैं. व्यक्ति बाहर से बिल्कुल फिट दिख सकता है, लेकिन उसे हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या ब्लड शुगर की समस्या हो सकती है. इसलिए अपनी ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की स्थिति जानना जरूरी है. खासतौर पर अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम और जरूरी जांच के बारे में सलाह लेनी चाहिए.

क्या तनाव भी बढ़ाता है खतरा?

तनाव को अकेले हार्ट अटैक का कारण मानना बिलकुल सही नहीं है. हालांकि, लंबे समय तक बना तनाव नींद, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है. इस तरह यह दूसरे जोखिम कारकों के साथ मिलकर दिल की सेहत पर असर डाल सकता है.

हार्ट अटैक से पहले कौन से संकेत दिखते हैं?

सबसे पहली बात, हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते हैं. सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, चक्कर या कमजोरी और हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक दर्द या असहजता इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं. कुछ मामलों में लक्षण हल्के होते हैं या आते-जाते रहते हैं. इसलिए कम उम्र होने के कारण ऐसे लक्षणों को गैस, थकान या तनाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें.

युवाओं को क्या करना चाहिए?

दिल की सेहत के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी और वजन, BP, शुगर व कोलेस्ट्रॉल पर नजर रखना महत्वपूर्ण है. जिन लोगों में पहले से जोखिम कारक मौजूद हैं, उन्हें डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए.

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