महिलाएं कभी गंजी नहीं होती. बाल झड़ते हैं और वापस आ जाते हैं, लेकिन आपने शायद ही किसी महिला को गंजेपन से जूझते देखा हो, लेकिन पुरुषों में गंजेपन के मामले काफी आम है. कई पुरुष मिल जाएंगे, जिनके सिर से फ्रंट हेयर लाइन साफ हो जाती है. पीछे से भी सारे बाल झड़ जाते हैं. अफसोस की बात ये है कि पुरुषों के बाल झड़ने के बाद हेयर ग्रोथ भी सही से नहीं होती, जिसके कारण जीवनभर का गंजापन झेलना पड़ता है. क्या कभी सोचा है आपने कि ऐसा क्यों होता है? एक तरफ महिलाओं के बढ़ती उम्र में भी सुंदर, घने और काले बाल रहते हैं, जबकि पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ बाल ही चले जाते हैं. ये कोई इत्तेफाक नहीं है और न ही कुदरत का करिश्मा है. इसके पीछे विज्ञान की पहेली और हार्मोन्स का खेल है.
क्यों होता है गंजापन?
पुरुषों में गंजेपन की समस्या को लेकर कई रिसर्च और स्टडीज सामने आई हैं. इस मामले में myhair.uk ने भी एक रिपोर्ट पब्लिश की है, जिसमें बताया गया है कि गंजेपन के पैटर्न को एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया कहा जाता है, जिसमें पुरुष और महिलाओं के बाल धीरे-धीरे पतले हो जाते हैं. कई बार ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में गंजापन भी आ जाता है, लेकिन ये पैटर्न पुरुष और महिलाओं में काफी अलग होता है.
क्यों पुरुष ज्यादा हैं शिकार?
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरुषों में गंजापन सिर के ऊपरी हिस्से से शुरू होता है. हेयर लाइन धीरे-धीरे पीछे जाने लगती है और एक समय के बाद सिर का एक बड़ा एरिया खाली हो जाता है. जबकि महिलाओं के मांग वाले हिस्से के हिस्से के बाल पतले हो जाते हैं, लेकिन पूरी तरह से गंजापन नहीं होता है.
इस दोनों ही स्थितियों के लिए डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (डीएचटी) हार्मोन जिम्मेदार है, जो बालों के माइक्रो पोर्स में जाकर उन्हें सिकोड़ देता है. इससे बाल छोटे और पतले हो जाते हैं, रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और नई हेयर ग्रोथ नहीं हो पाती. अब क्योंकि पुरुषों में डीएचटी हार्मोन का लेवल ज्यादा होता है, इसलिए बालों के झड़ने की संभावना ज्यादा होती है.
महिलाओं में क्यों नहीं होता गंजापन?
महिलाओं में डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (डीएचटी) हार्मोन का ज्यादा असर नहीं होता, क्योंकि ताउम्र महिलाओं को हार्मोनल उतार-चढ़ावे से गुजरना पड़ता है. महिलाओं में मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन का लेवल कम होने लगता है और इसी दौरान उनके बाल मांग से पतले हो जाते हैं. कई बार पोषण की कमी, तनाव, हार्मोन्स में गड़बड़ी और मेडिकल कंडीशन के कारण भी बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं, लेकिन इतना भी नहीं कि गंजापन हो जाए.
एक्सपर्ट बताते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं अपने बालों को लेकर ज्यादा सेंसिटिव होती है और इसलिए बालों की केयर भी करती हैं. बाल झड़ने पर महिलाएं सही इलाज कराती हैं, जिससे हेयर ग्रोथ रिकवर हो जाती है. दूसरी तरफ पुरुषों के बाल अपेक्षाकृत छोटे होते हैं, जिससे गंजापन साफ नजर आता है. महिलाओं के लंबे बाल हेयर लाइन को कवर कर लेते हैं, जिससे गंजापन विजिबल नहीं होता.
कब होती है शुरुआत?
अमेरिकन हेयर लॉस एसोसिएशन के आंकड़े बताते हैं कि लगभग 66% पुरुषों को 35 वर्ष की उम्र में किसी न किसी कारणवश हेयर लॉस हो जाता है, जबकि 50 की उम्र तक आते-आते 85% पुरुष कंप्लीट गंजेपन के शिकार हो जाते हैं, लेकिन पूरे जीवनकाल में 40% महिलाएं ही गंभीर गंजेपन का सामना करती हैं.
ये भी है गंजापन की वजह
पुरुषों में गंजेपन की समस्या को लेकर हावर्ड हेल्थ पब्लिशिंग ने एक भी रिपोर्ट बताया है कि पुरुषों में गंजेपन के लिए जो जींस जिम्मेदार होते हैं वो एक्स क्रोमोसोम से आते हैं, जो मां से मिलते हैं, जबकि महिलाओं के पास 2 एक्स क्रोमोसोम होते हैं, जो महिलाओं के बाल झड़ने की प्रोसेस को डबल इफेक्ट से धीमा कर देते हैं. पुरुषों की त्वचा भी महिलाओं की तुलना में सख्त और ऑइली होती है, जो हेयर लॉस के प्रमुख कारणों में से एक है.
ये भी पढ़ें:- नॉर्मल डिलीवरी अब ‘बीते जमाने’ की बात क्यों होती जा रही है? गायनोकोलॉजिस्ट ने बताई कड़वी सच्चाई!