Acute Kidney Injury Causes: देशभर में सूरज का पारा अब पूरी तरह हाई है. नौतपा में तेज धूप ने तापमान 45 डिग्री के करीब पहुंचा दिया है. मौसम की तपिश को देखते हुए पिछले दिनों मौसम विभाग ने कहीं यलो तो कहीं रेड अलर्ट जारी कर दिया है. लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव लोगों के लिए आफत बन गई है. इसका असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ रहा है, जो न सिर्फ चक्कर, बेहोशी और कमजोरी का कारण बन रहा है, बल्कि किडनी से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ा रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो, हीटवेव शरीर के कई जरूरी अंगों को भी प्रभावित करता है, जिनमें किडनी सबसे सेंसिटिव अंगों में से एक है.
कई मरीजों में ज्यादा गर्मी, पानी की कमी और शरीर पर बढ़ते तनाव के कारण अचानक किडनी के काम करने की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे एक्यूट किडनी इंजरी का जोखिम बढ़ जाता है. अब सवाल है कि आखिर एक्यूट किडनी इंजरी क्या है? हीटवेव का किडनी पर क्या होता है असर? गर्मी में क्यों बढ़ जाते हैं एक्यूट किडनी इंजरी के मामले? इस बारे में बता रहे हैं आरएमएल हॉस्पिटल दिल्ली के यूरोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत गोयल-
एक्यूट किडनी इंजरी क्या होता है?
डॉ. गोयल कहते हैं कि, एक्यूट किडनी इंजरी, एक ऐसी स्थिति है, जिसमें किडनी अचानक ठीक से काम करना बंद या धीमा कर देती है. हमारी किडनी शरीर से टॉक्सिक पदार्थों और ज्यादा पानी को बाहर निकालने का काम करती है. लेकिन जब शरीर में पानी की बहुत ज्यादा कमी हो जाती है या किडनी तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड नहीं पहुंच पाता है तो उसके काम करने की क्षमता तेजी से गिरने लगती है. हीटवेव के दौरान यही समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है.
हीटवेव में किडनी पर असर क्यों बढ़ता है?
शरीर में पानी की कमी: भीषण गर्मी में शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है. अगर व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता है तो शरीर तेजी से डिहाइड्रेट होने लगता है. डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में ब्लड की मात्रा कम हो जाती है और किडनी तक पर्याप्त ब्लड पहुंचना कम हो जाता है. इससे किडनी पर दबाव बढ़ता है और एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा बढ़ सकता है.
बीपी डाउन होने से: गर्मी में लंबे समय तक धूप में रहने, ज्यादा पसीना निकलने या हीट एग्जॉशन होने पर ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है. जब ब्लड प्रेशर कम होता है तो किडनी को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो किडनी सेल्स को नुकसान पहुंचने लगता है.
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: हीटवेव के दौरान सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि शरीर से सोडियम, पोटैशियम और अन्य जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं. इन मिनरल्स का संतुलन बिगड़ने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है. कई मरीजों में कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, भ्रम और पेशाब कम आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
किडनी की पुरानी समस्या: जिन लोगों को पहले से क्रोनिक किडनी डिजीज, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनकी किडनी पहले ही कमजोर होती है. ऐसे मरीजों में हीटवेव के दौरान थोड़ा डिहाइड्रेशन भी गंभीर किडनी इंजरी का कारण बन सकता है.
कुछ दवाइयों का असर: गर्मी में शरीर पर तनाव बढ़ने के कारण कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवा या अन्य दवाइयों का सेवन करने लगते हैं. कुछ पेन किलर किडनी में ब्लड फ्लो कम कर सकती हैं, जिससे हीटवेव के दौरान किडनी डैमेज होने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है.