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तेजी से बदलते मौसम में एलर्जी कर सकती परेशान, बचने के लिए अपनाएं 5 आसान तरीके, नहीं पड़ेंगे बीमार!

Weather Change Health Tips: गर्मी का मौसम अपने पूरे सितम पर है. तेजी से चमकता सूरज शरीर को अंदर से तोड़ सकता है. इसी का नतीजा है कि, बार-बार छींक, खांसी और आंखों से पानी आने की समस्या हो सकती है. दुनिया भर में करीब 40 करोड़ लोग एलर्जिक राइनाइटिस से पीड़ित हैं. अब सवाल है कि आखिर, बदलते मौसम में एलर्जी से कैसे बचें? कब डॉक्टर से मिलना जरूरी? आइए जानते हैं ऐसे ही 9 तरीकों के बारे में.

By: Lalit Kumar | Last Updated: May 5, 2026 5:45:47 PM IST



Weather Change Health Tips: गर्मी का मौसम अपने पूरे सितम पर है. तेजी से चमकता सूरज शरीर को अंदर से तोड़ सकता है. इसी का नतीजा है कि, बार-बार छींक, खांसी और आंखों से पानी आने की समस्या हो सकती है. दुनिया भर में करीब 40 करोड़ लोग एलर्जिक राइनाइटिस से पीड़ित हैं. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हवा में मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले तत्व- जैसे पराग (पोलन), नाक के रास्तों को प्रभावित करते हैं. जब यह समस्या ख़ास मौसम में होती है, तो इसे ‘हे फ़ीवर’ (Hay Fever) कहा जाता है. उत्तर अमेरिका में इसे मौसमी एलर्जी भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण कई तरह के पराग या एलर्जी पैदा करने वाले अन्य तत्व की वजह से हो सकते हैं.  

पिछले कुछ सालों में हे फ़ीवर के इलाज के लिए कई नई और पहले से ज़्यादा असरदार दवाएं उपलब्ध हुई हैं. रिसर्च से भी यह साफ़ हुआ है कि इन दवाओं का सही समय और तरीक़े से इस्तेमाल कैसे किया जाए. अब सवाल है कि आखिर, बदलते मौसम में एलर्जी से कैसे बचें? कब डॉक्टर से मिलना जरूरी? आइए जानते हैं ऐसे ही 5 तरीकों के बारे में.

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बदलते मौसम में ऐसे करें खुद का बचाव

1. नेज़ल स्प्रे का इस्तेमाल करें: बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही हल्की छींक या एलर्जी के लक्षण शुरू हो जाते हैं. ऐसी स्थिति में कई लोग दवाओं का सहारा लेते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं ऐसी स्थिति में नेजल स्प्रे अधिक असरदार हो सकता है. दरअसल, ये पहले पचती हैं और फिर पूरे शरीर में फैलती हैं, जिससे नाक तक पहुंचने वाली दवा की मात्रा कम रह जाती है, जबकि असली ज़रूरत वहीं होती है. वहीं, नेज़ल स्प्रे सीधे नाक में इस्तेमाल किया जाता है और तुरंत असर दिखाता है. यह सूजन को कम करने वाले कारणों पर सीधे काम करता है, जिससे नाक बंद होना, छींक आना और अन्य लक्षणों में बेहतर राहत मिलती है. 

2. नाक खोलने वाले स्प्रे से बचें: कई लोग बंद नाक से राहत पाने के लिए डीकंजेस्टेंट स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इससे समस्या और बढ़ सकती है. बता दें कि, डीकंजेस्टेंट स्प्रे जिनमें ऑक्सीमेटाज़ोलिन, फिनाइलएफ्रिन या ज़ाइलोमेटाज़ोलिन जैसे तत्व होते हैं, जो नाक की सूजन को कम करके काम करते हैं. ये खून की नसों को सिकोड़ देते हैं, जिससे नाक के अंदर की सूजी हुई परत छोटी हो जाती है और आपको सांस लेने में आसानी होती है. लेकिन अगर इनका लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए- आमतौर पर 5 दिन से ज़्यादा, तो खून की नसें इस दवा पर निर्भर होने लगती हैं. फिर जब आप स्प्रे नहीं लेते, तो नाक की सूजन और ज़्यादा बढ़ जाती है. इससे नाक पहले से ज़्यादा बंद होने लगती है, जिसे ‘रीबाउंड कंजेशन’ कहा जाता है.

3. ‘सेकंड-जनरेशन’ दवा चुनें: अगर आप गोली लेने का फैसला करते हैं, तो डॉक्टर की सलाह से नई पीढ़ी की दवाएं चुनें. जैसे- सिटिरिज़िन (certirizine-Zyrtec), लोराटाडिन (loratadine-Claritin) या फेक्सोफेनाडिन (fexofenadine-Allegra). ये दवाएं ज़्यादा असरदार होती हैं और पुरानी दवाओं के मुकाबले कम नींद लाती हैं. पहली पीढ़ी की दवाएं, जैसे डाइफेनहाइड्रामिन (Benadryl), क्लोरफेनिरामिन या डॉक्सिलामिन, अक्सर ज़्यादा सुस्ती और नींद का कारण बनती हैं. एलर्जी से जुड़ी रिसर्च और शिक्षा पर केंद्रित एनजीओ ‘यूफोरिया’ के उपाध्यक्ष और यूके स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज हॉस्पिटल लंदन में मानद सलाहकार एलर्जिस्ट और राइनोलॉजिस्ट ग्लेनिस स्कैडिंग कहते हैं, ‘हालांकि कई बार लोग एक साथ गोली और नेज़ल स्प्रे दोनों लेने लगते हैं, लेकिन यह आमतौर पर ‘पैसे की बर्बादी’ है. 

4. एलर्जी सीजन से पहले ही इलाज शुरू करें:  अक्सर लोग तब दवा शुरू करते हैं जब लक्षण दिखने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. बेहतर परिणाम के लिए एलर्जी सीज़न शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले ही नेज़ल स्प्रे का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए. एक ट्रायल में पाया गया कि जिन लोगों ने पराग (पोलन) का मौसम शुरू होने से चार हफ्ते पहले स्प्रे इस्तेमाल करना शुरू किया, उन्हें उन लोगों की तुलना में ज़्यादा राहत मिली, जिन्होंने लक्षण आने के बाद इलाज शुरू किया.

5. दवा नियमित रूप से लें:  बीबीसी पर डरहम कहते हैं कि “जब लोग कहते हैं कि दवा काम नहीं कर रही, तो इसके पीछे आमतौर पर दो कारण होते हैं- या तो दवा सही तरीके से नहीं ली जा रही होती है, या नियमित रूप से नहीं ली जा रही होती है.” रोज़ एक ही समय पर दवा लें, चाहे उस दिन लक्षण हों या नहीं. साथ ही, दवा की सही मात्रा का पालन करना भी ज़रूरी है. एक ट्रायल में पाया गया कि जिन लोगों ने कॉर्टिकोस्टेरॉइड और एंटीहिस्टामीन वाले स्प्रे का दिन में दो बार इस्तेमाल किया, उन्हें एक बार इस्तेमाल करने वालों से ज़्यादा फ़ायदा मिला.

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