Urinary Bladder Cancer Cause: तंबाकू का सेवन जानलेवा है. इसको लेकर एक बार फिर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है. आमतौर पर लोग तंबाकू को फेफड़ों के कैंसर से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हालिया मेडिकल रिसर्च और डॉक्टरों ने हैरान करने वाला खुलासा किया है. दावा है कि, तंबाकू यूरिन ब्लैडर कैंसर का खतरा भी काफी बढ़ा सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि तंबाकू में मौजूद हानिकारक केमिकल्स खून में घुलकर किडनी तक पहुंचते हैं. इसके बाद ये विषैले तत्व पेशाब के जरिए ब्लैडर (मूत्राशय) में जमा हो जाते हैं, जिससे वहां की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है. इसकी अनदेखी से समय के साथ कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
आरएमएल दिल्ली के यूरोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत गोयल कहते हैं कि, जो लोग नियमित रूप से धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हैं, उनमें ब्लैडर कैंसर का खतरा 2 से 4 गुना तक बढ़ सकता है. दरअसल, जो लोग सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, गुटखा, खैनी और जर्दा जैसे तंबाकू प्रोड्क्टस का इस्तेमाल करते हैं, उनके शरीर में हानिकारक केमिकल्स कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं. इन्हीं में ब्लैडर कैंसर भी शामिल है. यह जोखिम सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों में समान रूप से देखा गया है.
यूरिन ब्लैडर को कैसे नुकसान पहुंचाती है तंबाकू?
डॉक्टर की मानें तो कहते हैं, तंबाकू में मौजूद जहरीले केमिकल्स खून में मिलने के बाद किडनी उसे फिल्टर करती है और पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है. इस प्रक्रिया में तंबाकू के हानिकारक तत्व ब्लैडर में जमा होते रहते हैं और ये हानिकारक कार्सिनोजेन यानी कैंसर पैदा करने वाले केमिकल्स ब्लैडर की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकता है. लंबे समय तक ब्लैडर में रहने से इसकी कोशिकाओं में बदलाव होने लगते हैं, जिससे ब्लैडर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.
स्मोकिंग से यूरिन ब्लैडर कैंसर का खतरा कैसे?
लंबे समय से स्मोकिंग करने से ब्लैडर की अंदरूनी परत के टिश्यू डैमेज होने लगते हैं और सूजन बढ़ सकती है. दरअसल, जब लगातार कई सालों तक स्मोकिंग की जाती है, तो ब्लैडर की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव होने लगते हैं, जो कैंसर का रूप ले सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को पहले से ब्लैडर कैंसर हो चुका है और वह तंबाकू या स्मोकिंग जारी रखता है, तो दोबारा कैंसर होने की संभावना बढ़ सकती है.
यूरिन ब्लैडर कैंसर के लक्षण क्या हैं?
- पेशाब में खून आना, चाहे वह लाल या भूरे रंग का हो.
- पेशाब करते समय दर्द या जलन होना.
- बार-बार पेशाब लगना.
- अचानक तेज पेशाब की इच्छा होना.
- पेट या कमर के निचले हिस्से में दर्द.
ब्लैडर कैंसर होने से कैसे बचें?
- बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, गुटखा और वेपिंग बिल्कुल न करें.
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं.
- पेशाब लंबे समय तक न रोकें.
- बार-बार यूरिन इंफेक्शन या जलन होने पर चेक कराएं.
- केमिकल या फैक्ट्री में काम करते समय सेफ्टी डिवाइस जरूर पहनें.
- ताजे और मौसमी फल और सब्जियों को डाइट में शामिल करें.
- डायबिटीज और किडनी की बीमारी को कंट्रोल में रखें.