साल 2026 की गर्मी समझ से बाहर हो रही हैं. शुरुआती दिनों में ही पारा 45 डिग्री सेल्सियस यानी पार कर चुका है तो आगे क्या होगा? वैज्ञानिकों ने भी हीटवेव से बचने के सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की चेतावनी जारी कर दी है, क्योंकि इंसान का हाड़-मांस का शरीर एक लिमिट की ही गर्मी झेल सकता है. तापमान एक लेवल से ऊपर चला जाए तो शरीर अपने आप संकेत देने लगता है. हमारे सिक्स सेंस अलर्ट मोड में आ जाते हैं और शरीर का आंतरिक कूलिंग मकेनिज्म भी कमजोर पड़ने लगता है. आपने सुना होगा कि लू लगने से कई लोगों की मौत तक हो जाती है. वैज्ञानिकों ने बताया है कि आखिर ऐसा क्यों होता है और वो कौन सा लेवल है, जिससे एक पॉइंट भी आगे आने पर हमारा शरीर गर्मी सहने के लिए एकदम विफल हो जाता है.
कैसे मापते हैं शरीर का तापमान?
वैज्ञानिकों ने शोध के आधार पर बताया कि हमारे शरीर का आंतरिक तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहता है, जो पसीने, ऑक्सीजन और ब्लड सर्कुलेशन के जरिए अपने आप बैलेंस होता रहता है. हालांकि इंसान का शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है, ये निर्धारित करने के लिए थर्मामीटर नहीं, बल्कि बायोक्लाइमेटोलॉजिस्ट द्वारा वेट बल्प तापमान के मानकों को यूज करते हैं.
कितनी गर्मी सह लेगा आपका शरीर?
वैज्ञानिकों के अनुसाप, जब भी ह्यूमिडिटी ज्यादा होती है और पसीना त्वचा से सूख नहीं पाता तो शरीर के कूलिंग मकेनिज्म सिस्टम पर नेगेटिव असर पड़ता है. शेरवुड एंड ह्यूबर की 2010 की रिसर्च बताती हैं कि इंसान के शरीर की तापमान सहने की क्षमता 35 डिग्री वेट बल्ब तापमान प्रति 6 घंटा है, जबति मॉर्डन साइंस के आंकड़े बताते हैं कि आजकल के स्वस्थ युवा व्यस्कलगभग 30 डिग्री से 31 डिग्री सेल्सियस तापमान को आसानी से सहन कर सकते हैं. यही वो लेवल है, जब हमारा शरीर नेचुरली कूलिंग जनरेट करना छोड़ देता है, जबकि भीषण गर्मी के दिनों में सहन शक्ति 25 डिग्री से 28 डिग्री तक ही सीमित रह जाती है.
45 डिग्री सेल्सियस बढ़ा सकता है टेंशन
इसी वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि गर्मी का पारा जैसे ही 45 डिग्री सेल्सियस या इसे ऊपर चला जाता है तो ह्यूमिडिटी के साथ-साथ हेल्थ इमरजेंसी की कंडीशन पैदा हो सकती है. हालांकि एक साथ हेल्थ इशू नहीं होते, बल्कि शरीर धीरे-धीरे हेल्थ प्रॉबलम्स में पड़ जाता है.
शुरुआती संकेत: हार्ट तेजी से ब्लड पंप करने लगता है, जिससे ब्लड फ्लो स्किन की ऊपरी परत तक पहुंच जाता है, जिससे तेज पसीना, थकान, तेज सिर दर्द और चक्कर आने लगते हैं. कई लोगों को मसल्स में ऐंठन तक होने लगती है.
मिडिल लेवल: जैसे ही पारा 45 डिग्री से 47 डिग्री के बीच पहुंचता है, बॉडी का नेचुरल कूलिंग सिस्टम बंद हो जाता है. पसीना रुक जाता है और शरीर से हैवी वॉटर लॉस के चलते खून भी गाढ़ा हो जाता है. इससे किड़नी हार्ड फेलियर पर प्रैशर पड़ता है और फेलियर के चांस बढ़ जाते हैं.
एंड लेवल: जैसे ही शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या इससे ज्यादा होने लगे तो इसी कंडीशन को मेडिकल भाषा में हीट स्ट्रोक कहा गया है, जिसमें इंसान सको लगातार उल्टियां, दस्त, तेज बुखार, चक्कर, बेहोशी और दौरे तक पड़ने लगते हैं.
कब जानलेवा हो जाती है गर्मी?
मेडिकल रिसर्च से मालूम होता है कि शरीर में तापमान का हाईएस्ट लेवल बॉडी सेल्स को नष्ट करने लगता है. जैसे ही बॉडी का आंतरिक तापमान 40.5 डिग्री से 41 डिग्री सेल्सियस हो जाए तो पेशेंट को इमरजेंसी कूलिंग की आवश्यकता होती है. 42 डिग्री से 43 डिग्री तक आने पर बॉडी सेल्स के प्रोटीन नष्ट होने गते हैं, जिसे माइड, लिवर, किडनी और हार्ट को नुकसान होने लगता है. 43 डिग्री सेल्सियस तापमान फिजिकली और मेंटली घातक हो सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि 45 डिग्री से अधिक ह्यूमिडिटी वाली गर्मी के लगातार 2 से 6 घंटे संपर्क में रहने पर लू और ही स्ट्रेक के कारण मृत्यु भी हो सकती है. आंकड़े बताते हैं कि लू लगने से मृत्यु दर 10 फीसदी से बढ़कर 65 फीसदी तक पहुंच चुकी है.
किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
एक्सपर्ट बताते हैं कि 45 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्मी एक स्पेसिफिक एज ग्रुप के लिए खतरनाक होती है. विशेषतौर पर बच्चों और बुजुर्ग, क्योंकि इनकी इम्यूनिटी और सहने की शक्ति कमजोर होती है. इनके अलावा, गर्भवती महिलाओं, हार्ट, किड़नी और लिवर के मरीज, डायबिटीज के मरीज और मोटापे से ग्रस्त लोगों को भी खतरा रहता है.
भीषण गर्मी से कैसे करें बचाव?
हेल्थ एक्सपर्ट ने कहा कि भीषण गर्मी एक सीरियस इन्वायरमेंटल इशू है और ग्लोबल वार्मिंग का नतीजा है, जिसमें सावधानियां और सुरक्षात्मक उपायों को अपनाते हुए मृत्यु दर को रोका जा सकता है.
- दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें.
- शरीर को सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स से हाइड्रेटिड रखना चाहिए.
- यदि पानी की कमी है तो अपने यूरीन का कलर चेक करें. ये हल्का पीला होना चाहिए.
- कॉटन जैसे हल्के फैब्रिक के ढ़ीले-ढ़ाले और सांस लेने योग्य कपड़े पहनें.
- शरीर के तापमान को बैलेंस रखने के लिए कूलर, एसी और पंखा जैसे उपकरणों का यूज करें.
- तड़के सुबह और शाम को घर के खिड़की दरवाजे खोल दें ताकि ह्यूमिडिटी बाहर निकल सके.
- कभी-भी पेट को खाली न रखें. देर तक भूखे न रहें. शरीर को पोषक तत्वों से युक्त आहार दें.
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