PRP Knee Pain Therapy: मोहन (काल्पनिक नाम), उम्र लगभग 55 साल रही होगी. वो पिछले कई वर्षों से घुटनों के दर्द से परेशान थे. सुबह उठते ही चलना मुश्किल हो जाता था और सीढ़ियां चढ़ना तो मानो एक बड़ी चुनौती बन गया था. डॉक्टर, वैद्य और हकीम सभी को दिखाया, किसी ने दवाएं दीं तो किसी ने तेल मालिश करने को कहा. इनसे कुछ समय के लिए राहत जरूर मिलती थी, लेकिन दर्द फिर लौट आता. कुल मिलाकर दवा और तेल मालिश सब फेल. अंत में डॉक्टर ने उन्हें सर्जरी का विकल्प बताया, लेकिन मोहन डर की वजह से इससे बचना चाहते थे. बाद में डॉक्टर ने पीआरपी थेरेपी के बारे में सुझाया. इसको लेने के बाद मोहन को ऐसा लगा, जैसे जीवन दोबारा लौट आया हो. अब सवाल है कि आखिर, घुटनों के दर्द के लिए पीआरपी थेरेपी क्या है? पीआरपी थेरेपी कैसे की जाती है? इस बारे में बता रही हैं एलएनजेपी हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट पेन फिजिशियन डॉ. भुवना आहुजा-
घुटनों के दर्द के लिए पीआरपी थेरेपी क्या है?
डॉ. भुवना आहूजा कहती हैं कि, घुटनों के दर्द के लिए पीआरपी थेरेपी (PRP Therapy) एक आधुनिक और गैर-सर्जिकल उपचार है. इस प्रक्रिया में डॉक्टर मरीज का थोड़ा खून निकालकर उसे मशीन में घुमाते हैं, जिससे प्लेटलेट्स (Platelets) अलग हो जाते हैं. ये प्लेटलेट्स ग्रोथ फैक्टर्स से भरपूर होते हैं, जो टिशू को रिपेयर करने और सूजन कम करने में मदद करते हैं. इसके बाद इन्हें घुटने के दर्द वाले हिस्से में इंजेक्ट किया जाता है. बता दें कि, यह थेरेपी खासतौर पर ऑस्टियोआर्थराइटिस और पुराने घुटनों के दर्द में फायदेमंद मानी जाती है. हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है, इसलिए इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है.
किन लोगों के लिए अधिक फायदेमंद?
- ऑस्टियोआर्थराइटिस (घुटनों का घिसाव)
- पुराने या क्रोनिक घुटने का दर्द
- खेल-कूद से लगी चोट
- टेंडनाइटिस या लिंगामेंट इंजरी
- उम्र से जुड़ा घुटनों का दर्द
- सर्जरी के बाद का दर्द
पीआरपी थेरेपी के फायदे
- सर्जरी की जरूरत नहीं
- नेचुरल हीलिंग (अपने खून से इलाज)
- रिकवरी जल्दी हो सकती है
- क्रोनिक दर्द, जकड़न और सूजन में कमी
- चलने-फिरने और उठने-बैठने में सहजता
- खून आपके ही शरीर से, इसलिए साइड इफेक्ट का खतरा नहीं
- लंबे समय तक लाइफ क्वालिटी बेहतर बनी रहती है
PRP थेरेपी लेने से पहले किन बातों का रखें ध्यान
- 2–3 सिटिंग्स की जरूरत पड़ सकती है
- असर धीरे-धीरे दिखता है (कुछ हफ्तों में)
- हर मरीज में समान परिणाम नहीं
- सही डॉक्टर से करवाना जरूरी