Phone and memory Connection: आज के दौर में मोबाइल सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि हमारी याददाश्त का भी एक तरह से डिजिटल सहारा बन चुका है. फोन नंबर से लेकर जन्मदिन, अपॉइंटमेंट, पासवर्ड, शॉपिंग लिस्ट और रास्ते तक. मतलब हर चीज याद रखने का काम मोबाइल कर रहा है. ऐसे में कभी चाबी रखकर भूल जाना या किसी का नाम अचानक याद न आना चिंता का विषय बन जाता है. ऐसे में मन में सवाल उठता है कि, कहीं लगातार फोन पर निर्भर रहने से याददाश्त कमजोर तो नहीं हो रही? या फिर यह डिमेंशिया जैसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत है?
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, हर छोटी भूल को डिमेंशिया समझना सही नहीं है. कभी-कभार किसी कमरे में जाकर यह भूल जाना कि वहां क्यों आए थे, किसी परिचित का नाम कुछ देर के लिए याद न आना सामान्य अनुभव हो सकता है. खासकर जब थोड़ी देर बाद वह जानकारी खुद याद आ जाए और रोजमर्रा के काम प्रभावित न हों.
क्या फोन याददाश्त को कर सकता है प्रभावित?
नेविगेशन के लिए हर बार मोबाइल या मैप ऐप का इस्तेमाल करने से दिमाग को रास्तों और जगहों को खुद याद रखने की कम जरूरत पड़ती है. हमारे दिमाग का हिप्पोकैम्पस मानसिक नक्शा बनाने और स्थान से जुड़ी याददाश्त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जब हम रास्ता याद करने या दिशा समझने के बजाय हर बार ऐप पर निर्भर होते हैं, तो इस तरह की मानसिक याददाश्त का अभ्यास कम हो सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फोन का इस्तेमाल करने से किसी व्यक्ति को डिमेंशिया हो जाएगा. रिमाइंडर, कैलेंडर और नेविगेशन ऐप जरूरत पड़ने पर हमारी स्वतंत्रता और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाले उपयोगी उपकरण हैं.
कब भूलने की आदत को गंभीरता से लें?
चिंता की बात तब हो सकती है जब भूलने की समस्या बार-बार होने लगे, लगातार बढ़ रही हो और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे. मसलन, एक ही सवाल का बार-बार जवाब मिलने के बावजूद पूछना, हाल की घटनाओं या सीखी हुई जानकारी को भूल जाना, पैसों का हिसाब रखने और दवाइयां संभालने जैसे पहले से आसान कामों में परेशानी होना. इसके अलावा बातचीत के दौरान सामान्य शब्दों को खोजने में लगातार दिक्कत, तारीख या जगह को लेकर भ्रम और परिचित लोगों को पहचानने में परेशानी भी ध्यान देने के संकेत हो सकते हैं.
हर भूलना अल्जाइमर नहीं
अपोलो एडलक्स हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. पार्थसारथी बी के अनुसार, याददाश्त की समस्या के पीछे सिर्फ अल्जाइमर या डिमेंशिया ही कारण नहीं होता है. खराब नींद, तनाव, अवसाद, कुछ दवाइयां, विटामिन की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी याददाश्त और एकाग्रता को प्रभावित कर सकती हैं. इनमें से कुछ कारणों का इलाज संभव है.