Pet Dog Health Risks: पालतू कुत्तों का प्यार कई बार अनजाने में कितनी बड़ी आफत बन सकता है, इस बात का अंदाजा हाल ही में सामने आए कुछ डरावने मामलों से लगाया जा सकता है. ब्रिटेन में रहने वाली 56 साल की मंजीत संघा और डॉक्टर जैको नेल के साथ जो हुआ, वह किसी भयानक सपने से कम नहीं है. मंजीत जब काम से घर लौटीं, तो उनके पालतू कुत्ते ने उनके हाथ पर लगे एक छोटे से कट या खरोंच को चाट लिया था. किसी को क्या पता था कि कुत्ते की लार में मौजूद बैक्टीरिया उनके खून में जहर की तरह फैल जाएंगे और महज 24 घंटे के भीतर उनकी जिंदगी दांव पर लग जाएगी. घर लौटने पर उनके पति ने उन्हें बेहोश, ठंडे हाथ-पैर और नीले पड़ चुके होठों के साथ पाया. अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें छह बार कार्डियक अरेस्ट आए, निमोनिया और गॉलस्टोन की शिकायत हुई, स्प्लीन निकालनी पड़ी और जान बचाने के लिए उनके दोनों हाथ और पैर काटने पड़े.
कुछ ऐसा ही दर्दनाक हाल डॉ. जैको नेल का भी हुआ, जिन्हें अपने कुत्ते हार्वी के साथ खेलने के दौरान लगी हल्की सी खरोंच के बाद सेप्टिसीमिया यानी ब्लड पॉइजनिंग हो गई थी, जिसके चलते उन्हें महीनों आईसीयू में रहने के बाद अपने पैर और नाक का हिस्सा गंवाना पड़ा. यहां तक कि बुजुर्ग जून बैक्सटर की भी कुत्ते के चाटने से हुए सेप्टिक शॉक से अपनी जान गंवा चुके हैं.
क्या है सेप्टिसीमिया और कैसे फैलता है?
डब्ल्यूएचओ (WHO) के मुताबिक सेप्टिसीमिया एक जानलेवा स्थिति है, जो तब होती है जब हमारा इम्यून सिस्टम किसी संक्रमण से लड़ने के चक्कर में जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाता है और शरीर के अपने ही अंगों पर हमला करने लगता है. कुत्तों के मुंह और लार में ‘पाश्चुरेला मल्टोसिडा’ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाते हैं.
जब ये बैक्टीरिया हमारे शरीर पर मौजूद किसी छोटे से कट, खरोंच या खुले जख्म के जरिए खून में मिल जाते हैं, तो पूरे शरीर में तेजी से फैलने लगते हैं. चूंकि इसके शुरुआती लक्षण आम फ्लू या बुखार जैसे होते हैं, इसलिए लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, और यही वजह है कि इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है.
कुत्ते के चाटने से कैसे होती है अंगों की तबाही?
जब बैक्टीरिया खून में जहर घोल देते हैं, तो शरीर के ऑर्गन्स यानी अंग शॉक में जाने लगते हैं. मंजीत संघा के मामले में इन्फेक्शन इतनी तेजी से फैला कि उनके दिल की धड़कन छह बार रुकी, किडनियां फेल होने की कगार पर पहुंच गईं और टिशू डैमेज होने की वजह से गैंगरीन फैल गया.
संक्रमण को पूरे शरीर में फैलने से रोकने के लिए डॉक्टरों के पास उनके हाथ और पैर काटने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. डॉ. जैको नेल को भी इसी तरह के संक्रमण के कारण कोमा में जाना पड़ा था और महीनों डायलिसिस व अस्पताल के चक्कर काटने पड़े थे.
सेप्टिसीमिया के ये 6 लक्षण भूलकर भी न करें नजरअंदाज
बीबीसी की रिपोर्ट में सेप्टिसीमिया फंड ऑफ यूके ने बताया कि यह बीमारी शुरुआत में 6 लक्षण छोड़ती है. यदि इन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो शरीर और स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीरता से बचा जा सकता है.
- बोलने या समझने में अचानक परेशानी होना
- शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द होना
- बहुत तेज ठंड लगना और कंपकंपी छूटना
- पेशाब करने में तकलीफ या रुकावट होना
- सांस लेने में भारी दिक्कत महसूस होना
- स्किन पर अजीब से धब्बे या चकत्ते पड़ जाना
बचाव और सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज
इन डरावनी घटनाओं से हमें यह सबक मिलता है कि घर के प्यारे पालतू जानवरों का प्यार भी कई बार खतरनाक साबित हो सकता है. अगर आपके शरीर पर कहीं भी छोटा-सा कट, खरोंच या जख्म है, तो अपने कुत्ते या किसी भी पालतू जानवर को उसे चाटने बिल्कुल न दें. अगर कभी जानवर काटा या चाट भी ले, तो तुरंत जख्म को अच्छी तरह साफ करें और एंटीसेप्टिक लगाएं. अगर जरा भी बुखार, कमजोरी या फ्लू जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि इस बीमारी में एक-एक मिनट बहुत कीमती होता है.