Endometriosis: ये सच है कि, महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक जीवन जीती हैं. जबकि, महिलाएं जीवन भर कई बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं. कई ऐसी भी गुप्त बीमारियों का खतरा बढ़ता जिन्हें बताने में महिलाएं शर्मिंदगी महसूस करती हैं. जी हां, एंडोमेट्रियोसिस ऐसी ही बीमारियों में से एक है. बता दें कि, एंडोमेट्रियोसिस में महिलाओं के गर्भाशय के अंदर टिश्यू यूटरस के बाहर निकलकर ओवरी, फैलोपियन ट्यूब या पेट के अन्य अंगों पर उगने लगते हैं. ऐसे में जब पीरियड्स के दौरान ये टिश्यू टूटते है, तो महिलाओं को असाहनीय दर्द और सूजन होने लगती है. कई बार इस परेशानी से महिलाओं को इनफर्टिलिटी भी हो सकती है.
डॉक्टर की मानें तो, अब तक एंडोमेट्रियोसिस की पहचान करने के लिए पेट में छोटा सा छेद करके लैप्रोस्कोपिक प्रोसेस के जरिए टिश्यू चेक किए जाते हैं. यह प्रोसेस महिलाओं के लिए बहुत ही दर्द होती है, इसलिए वे इसे कराने से बचती हैं. हालांकि, अब स्टडी में दावा किया गया है कि महिलाओं को सर्जरी का दर्द सहने की जरूरत नहीं है. क्योंकि, पीरियड ब्लड से महिलाओं की इस गुप्त बीमारी की पहचान हो सकेगी. जानिए क्या कहती है स्टडी-
एंडोमेट्रियोसिस पर क्या है स्टडी?
Nature Communications Medicine में प्रकाशित फ्रांस की बायोटेक कंपनी की स्टडी में बड़ा दावा किया गया है. रिसर्च में पाया गया है कि मेंस्ट्रुअल ब्लड यानी पीरियड्स के ब्लड में मौजूद स्टेम सेल्स की मदद से एंडोमेट्रियोसिस की पहचान की जा सकती है. दावा है कि, पीरियड्स के ब्लड से निकाले गए स्टेम सेल्स में डीएनए मिथायलेशन (DNA methylation) बदलाव दिखते हैं, जो एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं और सेहतमंद महिलाओं के बीच के फर्क को बताते हैं. डीएनए मिथायलेशन एक ऐसा प्रोसेस है, जिसमें डीएनए पर छोटे केमिकल टैग जुड़ते हैं और यह तय करते हैं कि कौन-से जीन एक्टिव होंगे और कौन-से नहीं जीन नहीं होंगे.
एंडोमेट्रियोसिस से जुड़ी स्टडी के परिणाम?
रिसर्च टीम ने 19 सेहतमंद महिलाओं और 23 एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं के मेंस्ट्रुअल ब्लड से स्टेम सेल्स निकाले गए. यह वही सेल्स हैं, जो हर पीरियड के दौरान गर्भाशय की परत की मरम्मत में मदद करते हैं. वैज्ञानिकों ने इन सेल्स के पूरे जीनोम की रिसर्च की और पाया कि 400 से ज्यादा ऐसे जिनोमिक रिजन्स थे जहां डीएनए मिथायलेशन का पैटर्न अलग था. इनमें कई जीन सूजन, टिश्यू ग्रोथ और एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े बदलावों से जुड़े हुए थे.
रिसर्च से क्या फायदा हो सकता है?
एंडोमेट्रियोसिस की पहचान करने के लिए महिलाओं को दर्द से गुजरना पड़ता था और इस वजह से वे डॉक्टर के पास जाने से हिचकती थी. अब इस स्टडी के अनुसार, भविष्य में बिना सर्जरी के एंडोमेट्रियोसिस की पहचान संभव हो सकती है और महिलाओं को बिना दर्द एंडोमेट्रियोसिस का पता चल सकेगा.