Home > हेल्थ > PMOS में पीरियड्स ही प्रभावित नहीं होते! मां बनने की राह में भी बनता बाधा, समझें महिलाओं की सेहत का पूरा गणित

PMOS में पीरियड्स ही प्रभावित नहीं होते! मां बनने की राह में भी बनता बाधा, समझें महिलाओं की सेहत का पूरा गणित

PMOS and Fertility: कई महिलाओं के पीरियड्स समय पर नहीं आते, चेहरे पर मुंहासे आने लगते हैं या वजन तेजी से बढ़ने लगता है. अक्सर महिलाएं इन बदलावों को सामान्य हार्मोनल उतार-चढ़ाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन, अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहें, तो इनके पीछे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS अब PMOS) जैसी स्थिति हो सकती है. डॉक्टर से समझिए-

By: Lalit Kumar | Last Updated: October 4, 2026 10:49:46 AM IST



PMOS and Fertility: PMOS and Fertility: कई महिलाओं के पीरियड्स समय पर नहीं आते, चेहरे पर मुंहासे आने लगते हैं या वजन तेजी से बढ़ने लगता है. अक्सर महिलाएं इन बदलावों को सामान्य हार्मोनल उतार-चढ़ाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन, अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहें, तो इनके पीछे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS अब PMOS) जैसी स्थिति हो सकती है. यह केवल पीरियड्स को अनियमित करने वाली समस्या नहीं है, बल्कि महिलाओं की प्रजनन क्षमता, हार्मोन और मेटाबॉलिक हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है. यही वजह है कि समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना और सही सलाह लेना जरूरी है. अब सवाल है कि आखिर, क्या है PMOS और क्यों है यह चिंता का विषय? पीरियड्स से लेकर फर्टिलिटी तक क्या पड़ता है असर? इस बारे में बता रही हैं शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा की सीनियर कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. शहला जमाल-

क्या है PCOS और क्यों है यह चिंता का विषय?

PCOS महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिति है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रजनन आयु की लगभग 10-13 प्रतिशत महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं. चिंता की बात यह है कि प्रभावित महिलाओं में से करीब 70 प्रतिशत को इसके बारे में पता ही नहीं होता है. मई 2026 में प्रकाशित वैश्विक सहमति प्रक्रिया के बाद इस स्थिति के लिए पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) नाम भी प्रस्तावित किया गया. यह नाम इस बात पर जोर देता है कि समस्या केवल अंडाशय तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से भी जुड़ी है.

पीरियड्स से लेकर फर्टिलिटी तक पड़ता है असर

डॉ. शहला जमाल कहती हैं कि, PMOS में ओव्यूलेशन यानी अंडाशय से अंडा निकलने की प्रक्रिया नियमित रूप से नहीं हो पाती है. इसके कारण पीरियड्स देर से आ सकते हैं, कई महीनों तक रुक सकते हैं या उनकी नियमितता बिगड़ सकती है. जब ओव्यूलेशन प्रभावित होता है, तो गर्भधारण करने में भी परेशानी हो सकती है. हालांकि, PCOS होने का मतलब यह नहीं है कि महिला मां नहीं बन सकती हैं. सही जांच, डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार इलाज से कई महिलाओं को गर्भधारण करने में मदद मिलती है.

सिर्फ प्रजनन क्षमता नहीं, मेटाबॉलिज्म भी होता प्रभावित

इस स्थिति में कुछ महिलाओं के शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हो सकती है. इसमें शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है. इसके अलावा वजन बढ़ना, चेहरे पर अतिरिक्त बाल आना, मुंहासे और सिर के बाल पतले होना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. हर महिला में लक्षण एक जैसे नहीं होते हैं. इसलिए केवल वजन बढ़ने या पीरियड्स अनियमित होने के आधार पर PMOS नहीं मान लेना चाहिए.

लाइफस्टाइल में बदलाव से मिल सकती है मदद

डॉ. शहला जमाल के अनुसार, PCOS का कोई परमानेंट इलाज नहीं है, पर लाइफस्टाइल बदलकर इसे 90% तक कंट्रोल किया जा सकता है. इसको समझने और संभालने में समय पर जांच तथा उचित मेडिकल देखभाल बेहद जरूरी है. नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखने से मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.

PMOS के घरेलू नुस्खे

  • सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में दालचीनी पाउडर लें.
  • स्पीयरमिंट (पुदीना) की चाय पीने से अनचाहे बालों में आराम मिलता है.
  • रोज सुबह 5-6 भीगे हुए बादाम खाएं.

Advertisement