Home > हेल्थ > बरसात में ‘फ्लाई ऐश’ और दूषित पानी का खतरा, आई फ्लू और पेट के इंफेक्शन के हो सकते शिकार, जानिए बचाव के उपाय

बरसात में ‘फ्लाई ऐश’ और दूषित पानी का खतरा, आई फ्लू और पेट के इंफेक्शन के हो सकते शिकार, जानिए बचाव के उपाय

Monsoon Health Tips: मानसून अपने साथ राहत तो लेकर आता है, लेकिन सेहत के लिए कई चुनौतियां भी बढ़ा देता है. इस मौसम में जगह-जगह जलभराव, दूषित पानी और हवा में मौजूद धूल व फ्लाई ऐश (Fly Ash) के महीन कण लोगों की सेहत पर असर डाल सकते हैं. जानिए, फ्लाई ऐश क्या है और क्यों बढ़ता है खतरा? इससे कैसे बचाव?

By: Lalit Kumar | Published: July 21, 2026 3:04:50 PM IST



Monsoon Health Tips: ये सच है कि, मानसून अपने साथ राहत तो लेकर आता है, लेकिन सेहत के लिए कई चुनौतियां भी बढ़ा देता है. इस मौसम में जगह-जगह जलभराव, दूषित पानी और हवा में मौजूद धूल व फ्लाई ऐश (Fly Ash) के महीन कण लोगों की सेहत पर असर डाल सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, बारिश के दौरान दूषित पानी और खराब स्वच्छता के कारण पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जबकि आंखों में संक्रमण फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया के संपर्क से आई फ्लू (कंजंक्टिवाइटिस) के मामले भी बढ़ सकते हैं. ऐसे में थोड़ी-सी सावधानी आपको कई परेशानियों से बचा सकती है. अब सवाल है कि आखिर, फ्लाई ऐश क्या है और क्यों बढ़ता है खतरा? इससे कैसे बचाव? आइए जानते हैं काम की बात-

फ्लाई ऐश क्या है और क्यों बढ़ता खतरा?

फ्लाई ऐश कोयले से चलने वाले ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली महीन राख होती है. बारिश और तेज हवा के दौरान इसके कण वातावरण में फैल सकते हैं. ये कण आंखों, नाक और श्वसन तंत्र में जलन पैदा कर सकते हैं. बता दें कि, जिन लोगों को एलर्जी, अस्थमा या सांस की बीमारी है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

दूषित पानी से बढ़ सकता है संक्रमण

मानसून में पानी के स्रोत दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसा पानी पीने या उससे बनी चीजें खाने पर डायरिया, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, हैजा और अन्य पेट संबंधी संक्रमण हो सकते हैं. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह जोखिम अधिक होता है.

आई फ्लू क्यों फैलता है?

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, आई फ्लू, जिसे कंजंक्टिवाइटिस भी कहा जाता है. यह वायरस या बैक्टीरिया के कारण फैल सकता है. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क, तौलिया, रूमाल या आंखों को बार-बार छूने से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. इसके लक्षणों में आंख लाल होना, पानी आना, खुजली, जलन और चिपचिपा स्राव शामिल हो सकते हैं.

इन उपायों से करें बचाव

  • केवल उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं.
  • सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें.
  • खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोएं.
  • आंखों को गंदे हाथों से न छुएं.
  • आई फ्लू के मरीज का तौलिया, तकिया या रूमाल साझा न करें.
  • बारिश में भीगने के बाद साफ पानी से आंख और चेहरा धो लें.
  • एलर्जी या सांस की समस्या होने पर धूल और फ्लाई ऐश वाले क्षेत्रों में मास्क का इस्तेमाल करें.
  • घर और आसपास पानी जमा न होने दें.

कब लें डॉक्टर की सलाह?

यदि तेज बुखार, लगातार दस्त, उल्टी, शरीर में पानी की कमी, आंखों में तेज दर्द, धुंधला दिखाई देना या आंख से अधिक मवाद निकलने जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर इलाज कराने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.

बरसात में ऐसे रखें सेहत का खास ध्यान

मानसून का आनंद तभी लिया जा सकता है, जब स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाए. साफ पानी पीना, स्वच्छता बनाए रखना, संतुलित भोजन करना और संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करना इस मौसम में सबसे जरूरी है. थोड़ी-सी सावधानी आपको आई फ्लू, पेट के संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है.

Advertisement