Magnesium Deficiency: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल में तमाम गंभीर परेशानियां जन्म ले रही हैं. इससे निजात पाने के लिए लोग तमाम सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं. मैग्नीशियम इसमें से एक हैं. जी हां, आजकल अच्छी नींद, मांसपेशियों में दर्द और थकान से राहत पाने के लिए लोग मैग्नीशियम सप्लीमेंट का इस्तेमाल खूब कर रहे हैं. कोई बेहतर नींद के लिए मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट ले रहा है, तो कोई कब्ज से राहत पाने के लिए मैग्नीशियम साइट्रेट का सहारा लेता है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि, हर व्यक्ति को मैग्नीशियम सप्लीमेंट लेने की जरूरत है? क्या इसकी कमी को नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है? चीफ न्यूट्रिशनिस्ट उर्वी लखवानी के मुताबिक, मैग्नीशियम शरीर के लिए बेहद जरूरी मिनरल है, लेकिन बिना जरूरत इसका सप्लीमेंट लेना फायदे के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है. पढ़िए सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी-
शरीर के लिए क्यों जरूरी है मैग्नीशियम?
चीफ न्यूट्रिशनिस्ट उर्वी लखवानी न्यूज नाइन को बताती हैं कि, मैग्नीशियम शरीर में होने वाली सैकड़ों जैविक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है. यह ऊर्जा बनाने, मांसपेशियों और नसों को सही तरीके से काम करने, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने और प्रोटीन के निर्माण में मदद करता है. शरीर आंतों और किडनी की मदद से इसके अवशोषण और उत्सर्जन को नियंत्रित करता है. इसलिए स्वस्थ लोगों को भोजन से मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा हासिल करना चाहिए. इसके लिए साबुत अनाज, दालें, नट्स, बीज और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कर सकते हैं.
किन लोगों में हो सकती मैग्नीशियम की कमी?
कुछ लोगों में मैग्नीशियम की कमी या इसका लेवल कम होने का जोखिम दूसरों के मुकाबले अधिक हो सकता है. ये वो लोग हैं, जिनकी डाइट में साबुत अनाज, दालें, मेवे और हरी सब्जियां कम होती हैं. इसके अलावा, लंबे समय तक दस्त रहने, पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करने वाली आंतों की बीमारियों और अधिक शराब के सेवन से भी मैग्नीशियम की कमी का खतरा बढ़ सकता है. कुछ दवाएं, जैसे डाइयूरेटिक्स (पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं) और प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स (एसिडिटी की कुछ दवाएं), लंबे समय तक सेवन करने वालों में भी मैग्नीशियम का लेवल कम हो सकता है.
मांसपेशियों में ऐंठन और थकान इसकी कमी के संकेत?
मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी और थकान मैग्नीशियम की कमी से जुड़े लक्षण हो सकते हैं. गंभीर कमी की स्थिति में दिल की धड़कन की लय भी प्रभावित हो सकती है. हालांकि, ये लक्षण कई दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं. इसलिए केवल थकान या पैरों में ऐंठन होने पर मैग्नीशियम की कमी मान लेना सही नहीं है. डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट और व्यक्ति की डाइट, लक्षणों तथा दवाओं की हिस्ट्री को ध्यान में रखकर स्थिति का आकलन करते हैं. खून में मैग्नीशियम की जांच भी जरूरी है, क्योंकि शरीर का अधिकांश मैग्नीशियम हड्डियों और ऊतकों में होता है.
मैग्नीशियम सप्लीमेंट लेने से पहले रखें ध्यान
मैग्नीशियम के अलग-अलग रूपों का इस्तेमाल अलग जरूरतों के लिए किया जाता है. मैग्नीशियम साइट्रेट का लैक्सेटिव प्रभाव हो सकता है, इसलिए यह कुछ कब्ज संबंधी उत्पादों में इस्तेमाल होता है. वहीं, मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट को अक्सर पेट से जुड़ी परेशानी कम रखने के लिए चुना जाता है. हालांकि, किसी एक प्रकार को हर व्यक्ति के लिए सबसे बेहतर नहीं माना जा सकता.