Joint Cracking Sound Causes: मजबूत शरीर के लिए हड्डियों का हेल्दी रहना बेहद जरूरी है. क्योंकि, यही तो हैं जिनपर हमारी पूरी बॉडी टिकी होती है. अगर इनमें कोई दिक्कत आ जाए तो चलना-फिरना तो दूर, उठना-बैठना तक मुश्किल हो जाता है. कई बार हमारे जोड़ अचानक टक-टक या कड़क की आवाज करते हैं. यह अनुभव लगभग हर इंसान ने कभी न कभी महसूस किया होगा. इनमें उंगलियों के क्रैक होने से लेकर घुटनों, टखनों, गर्दन या पीठ में होने वाली आवाजें भी शामिल हैं. आमतौर पर लोग इसे कभी थकान, कभी कमजोरी और कई किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत समझ लेते हैं. लेकिन आधुनिक हेल्थ रिसर्च बताती है कि जोड़ का हर बार चटकना बीमारी नहीं होता, बल्कि इसमें कई बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक कारण काम करते हैं. अब सवाल है कि आखिर जोड़ों में चटकने की आवाज क्यों आती है? सबसे ज्यादा चट-चट की आवाज कहां से आती है? उंगलियों को चटकाना क्यों नहीं चाहिए? एक रिसर्च से समझिए इस परेशानी को-
घुटनों से चटकने की आवाज क्यों आती है?
एलएनजेपी हॉस्पिटल की पेन कंसलटेंट डॉ. भुवना आहुजा कहती हैं कि, उम्र बढ़ने, मांसपेशियों की कमजोरी, मोटापे या लंबे समय तक बैठने के कारण घुटने के जोड़ों की हरकत में हल्की अनियमितता आ जाती है. कई बार यह आवाज़ इसलिए होती है कि टेंडन या लिगामेंट अपनी जगह से हल्का-सा फिसलते हुए वापस लौटते हैं, जिससे पॉप जैसी ध्वनि होती है. यह सामान्य है और दर्द न होने पर आमतौर पर किसी बीमारी का संकेत नहीं माना जाता. लेकिन यदि आवाज के साथ दर्द, सूजन, लॉकिंग या चलने में असहजता महसूस हो, तो यह कार्टिलेज की क्षति, मेनिस्कस की समस्या या शुरुआती ऑस्टियोआर्थराइटिस का संकेत हो सकता है, जिसकी जांच करवाना जरूरी होता है.
घुटने चटकने पर क्या कहती है रिसर्च
साल 2018 में अमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने नॉइज अराउंड दे नीज को लेकर एक रिसर्च की. इस रिसर्च में 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों पर अध्ययन किया गया. घुटने में आवाज के फैलने की कुछ सिस्टमैटिक रिपोर्ट्स में पाया कि 38.1 प्रतिशत महिलाओं के मुकाबले महज 17.1 प्रतिशत पुरुषों के घुटने चटकते हैं. कई नवीनतम अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि जिन लोगों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जो नियमित रूप से स्ट्रेचिंग या हल्की कसरत करते हैं, उनमें जोड़ों की आवाजें अपेक्षाकृत कम होती हैं.
जोड़ों के चटकने को कैसे करें कम
एक्सपर्ट कहते हैं कि, पर्याप्त पानी पीएं, कैल्शियम-विटामिन डी का संतुलित स्तर और अधिक समय तक एक ही मुद्रा में न बैठना भी इस समस्या को कम कर सकता है. दरअसल, शरीर जब गर्म होता है या बेहतर ब्लड सर्कुलेशन में आता है, तो सिनोवियल फ्लूइड अधिक लचीला हो जाता है, और जोड़ स्थिरता के साथ मूव करते हैं. इस तरह जोड़ों का चटकना मानव शरीर का एक प्राकृतिक हिस्सा है, जिसका ज्यादातर हिस्सा पूरी तरह से हानिरहित है. विज्ञान बताता है कि यह आवाज एक जटिल लेकिन सामान्य बायोमैकेनिकल घटना है. इसे घुटनों के कमजोर होने या हड्डियों के टूटने का संकेत समझने की जरूरत नहीं है, जब तक कि इसके साथ दर्द या सूजन न हो.
यहां आती सबसे ज्यादा चटकने की आवाज
जोड़ों की यह आवाज सबसे ज्यादा उन जगहों पर सुनाई देती है जहां हड्डियां आपस में नहीं रगड़तीं बल्कि उनके बीच एक मुलायम और चिकना लुब्रिकेंट यानी सिनोवियल फ्लूइड मौजूद रहता है. जब हम अचानक किसी जोड़ को खींचते हैं या मोड़ते हैं, तो उसके भीतर मौजूद गैस के छोटे-छोटे बुलबुले तेजी से टूटते हैं. वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को कैविटेशन कहते हैं, और इसी बुलबुले के फटने से वह तेज आवाज पैदा होती है. कई एमआरआई-आधारित अध्ययनों में यह साफ दिखाई दिया है कि उंगलियों या घुटने के चटकने के तुरंत बाद जोड़ के अंदर बनने-फटने वाले गैस बुलबुलों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे यह सिद्ध हुआ कि आवाज हड्डियों के टकराने से नहीं बल्कि इस रासायनिक-भौतिक प्रक्रिया से आती है.
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उंगलियों को क्यों नहीं चटकाना चाहिए
पिछले दो दशकों में कई रिसर्च हुईं और ज्यादातर निष्कर्ष यही मिले कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसा करने से गठिया जैसी बीमारी नहीं होती. अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि उंगलियों को सुबह-शाम चटकाने से जोड़ घिसते हैं या हड्डियां कमजोर होती हैं. हां, बार-बार तेजी से या जोर लगाकर ऐसा करने से आसपास के लिगामेंट और टिशू थोड़े ढीले हो सकते हैं, जिससे कुछ लोगों को हल्का दर्द, जकड़न या अस्थायी सूजन महसूस हो सकती है.