आम का सीजन आते ही मैंगो स्मूदी, आइसक्रीम और मैंगो शेक का शौक दोबारा जीवंत हो उठता है. आम से बने डिशेज जितना टेस्टी होते हैं, उतने ही हाइड्रेटिंग भी होते हैं, लेकिन मई-जून आते ही आम का क्रेज इतना बढ़ जाता है कि व्यापारी आर्टिफीशियल फूड कलर्स और केमिकल्स से आम को पकाते हैं, जिसे खाते ही पेट की बीमारियां जैसे-गैस, एसिडिटी, दस्त और उल्टी की समस्या घेर सकती हैं. ऐसे आमों से फूड पॉइजनिंग होना भी आम बात है. इसलिए आप को खरीदने और घर पर लाने से पहले शुद्धता की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए.
केमिकल वाले आमों की पहचान
मई-जून आते ही मार्केट में कैल्शियम कार्बाइड से पके हुए आमों की भरमार हो जाती है. हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां FSSAI ने छापेमारी करके सैंकड़ों कैरेट आम बरामद किए हैं, जिन्हें कैमिकल से पकाया गया था. बता दें कि कैल्शियम कार्बाइड एक प्रतिबंधित कैमिकल है, जिसका इस्तेमाल आयरन वेल्डिंग के लिए किया जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे आम पकाने के लिए यूज कर रहे हैं. इस कैमिकल को कच्चे आमों की कैरेट में रखा जाता है, जिसके बाद मॉइश्चर मिलते ही ये एसिटिलीन गैस रिलीज करते हैं, जिसमें आर्सेनिक और फॉसफोरस जैसे हानिकारक तत्व होते हैं. कार्बाइड आम को जल्दी तो पका देता है, लेकिन ये आम सेहत के लिए बिल्कुल सेफ नहीं होते.
- ऐसे आम दिखने में एक दम सटीक पीले, साफ-सुथरे और खूबसूरत होते हैं.
- इन आमों बंद बॉक्स में पकाया जाता है, जिससे दाग-धब्बे भी नजर नहीं आते.
- केमिकल से पके आम अल्सर, कैंसर, मेंटल इलनेस, हार्मोनल संतुलन बिगाड़ सकते हैं.
आम की पहचान के वीडियो का सच?
हर साल आम की सीजन आते ही सोशल मीडिया पर असली-नकली की पहचान वाला वीडियो भी वायरल होने लगता है. सोशल मीडिया यूजर्स लोगों की जागरुकता के लिए फलों में कैमिकल को पहचानने के तरीके बताने हैं, जिसमें से ज्यादातर सटीक नहीं होते. कुछ लोगों को लगता है कि यदि यदि आम पानी में डूब जाए तो असली है और पानी में तैरने वाला आम केमिकल से पका हुआ. जबकि ये दावा पूरी तरह से सच नहीं है.
-हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि कैल्शियम कार्बाइड से पके हुए आम की डंठल पर नींबू रगड़कर चेक किया जा सकता है. यदि आम नींबू के साथ रिएक्ट करने पर बैंगनी रंग छोड़े तो समझ जाएं कि इसे प्रतिबंधित कैमिकल कैल्शियल कार्बाइड से पकाया गया है.
-इसके अलावा, बेकिंग सोडा से भी आम की शुद्धता को जांच सकते हैं. इसके लिए 15 से 20 मिनट के लिए आमों को पानी में भिगो दें और पानी मे थोड़ा-सा बेकिंग सोड़ा मिला दें, यदि आम को धोने के बाद छिलके रंग बदल जाए या पानी में चमक उतर जाए तो समझ जाएं आम केमिकलयुक्त है.
आम खरीदने और खाने से जुड़ी सावधानियां
जो आम सबसे पहले मार्केट में आते हैं, वो ज्यादा दाम पाते हैं. यही वजह है कि इन्हें केमिकल से पकाया जाता. यदि आप आमों की इस हेरफेर से बचना चाहते हैं तो नीचे दिए टिप्स फॉलो कर सकते हैं-
- एक दम इमोजी जैसा चमकता हुआ आम नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि नेचुरली पके हुए आम में दाग-धब्बे होते हैं.
- यदि आम पर सफेद रंग का पाउडर जैसा कुछ लगा हुआ दिखे तो आम को खरीदने से बचें.
- नेचुरल पके हुए आमों में भीनी खुशबू आती है, जबकि केमकिल से पके आमों में ऐसा नहीं होता.
- बहुत ज्यादा सख्त या ज्यादा नरम आम खरीदने से बचें, आम को खरीदने से पहले दबाकर चेक करें.
- आम को घर लाने के बाद करीब 1 से 2 घंटे पानी में भिगोकर रखें, ताकि ऊपर चिपके टॉक्सिंस अलग हो जाएं.
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