Gut-Brain Connection: क्या आपने कभी महसूस किया है कि जब पेट ठीक नहीं होता, तो चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है. तनाव महसूस होने लगता है और किसी भी काम में मन नहीं लगता है? अगर हां, तो यह सिर्फ आपका भ्रम नहीं सच्चाई है. विज्ञान अब मानता है कि हमारी आंतें केवल भोजन पचाने का काम नहीं करतीं, बल्कि इन्हें शरीर का ‘दूसरा दिमाग’ (Second Brain) भी कहा जाता है. यही वजह है कि पेट की गड़बड़ी का असर सीधे हमारे मूड, भावनाओं और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, आंत और मस्तिष्क के बीच एक मजबूत कनेक्शन (Gut-Brain Connection) होता है, जो यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि हम खुश महसूस करेंगे या तनावग्रस्त. अब सवाल है कि आखिर, पेट और दिमाग के बीच क्या कनेक्शन है? इसे स्वस्थ रखने के लिए क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं इस बारे में-
क्या है ‘दूसरा दिमाग’?
आंतों की दीवारों में करीब 10 करोड़ से ज्यादा तंत्रिका कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) मौजूद होती हैं. इसे एंटेरिक नर्वस सिस्टम (Enteric Nervous System) कहा जाता है. यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे शरीर का ‘दूसरा दिमाग’ कहते हैं. यह सिस्टम भोजन को पचाने, पोषक तत्वों के अवशोषण और आंतों की गतिविधियों को कंट्रोल करता है.
पेट और दिमाग कैसे जुड़े हैं?
आंत और मस्तिष्क वेगस नर्व (Vagus Nerve) के जरिए लगातार एक-दूसरे को संदेश भेजते रहते हैं. जब आंतों का संतुलन बिगड़ता है, तो उसके संकेत दिमाग तक पहुंचते हैं, जिससे तनाव, चिंता और मूड में बदलाव महसूस हो सकता है.
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, शरीर में बनने वाले करीब 90 प्रतिशत सेरोटोनिन (Serotonin) का उत्पादन आंतों से होता है. इसे ‘हैप्पी हार्मोन’ भी कहा जाता है. यही रसायन हमारे मूड, नींद और भावनाओं को प्रभावित करता है.
पेट खराब होने पर मूड क्यों बिगड़ता है?
अगर आंतों में अच्छे बैक्टीरिया (Gut Microbiome) का संतुलन बिगड़ जाए या बार-बार गैस, कब्ज, एसिडिटी या संक्रमण की समस्या हो, तो इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है. ऐसे में व्यक्ति को चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है. इसके साथ ही, तनाव और चिंता, थकान और सुस्ती, अनिद्रा और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है.
आंतों को स्वस्थ रखने के आसान उपाय
- रोजाना फाइबर से भरपूर भोजन करें.
- दही, छाछ और अन्य प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें.
- पर्याप्त पानी पिएं.
- नियमित व्यायाम और योग करें.
- पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने की कोशिश करें.
- जंक फूड और जरूरत से ज्यादा प्रोसेस्ड फूड खाने से बचें.
कब डॉक्टर से सलाह लें?
अगर लंबे समय तक पेट दर्द, कब्ज, दस्त, बार-बार एसिडिटी, अचानक वजन कम होना या लगातार उदासी और चिंता जैसी समस्याएं बनी रहें, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें. ऐसे मामलों में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.