Gastritis vs Acidity: गर्मियों अपने साथ कई बड़ी परेशानियां लेकर आती हैं. इस मौसम में सबसे ज्यादा पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ती हैं. इनमें सबसे आम हैं गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी. आजकल पेट में जलन, भारीपन, खट्टी डकारें और ऊपरी पेट में दर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग समस्याएं हैं. डॉक्टरों के अनुसार समय पर पहचान और सही खान-पान से इनसे बचाव संभव है. अक्सर लोग इन लक्षणों को देखकर तुरंत एसिडिटी मान लेते हैं. इन दोनों बीमारियों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इनके बीच का फर्क समझ नहीं पाते हैं. लेकिन, डॉक्टर कहते हैं कि, गैस्ट्राइटिस और एसिडिटी दो अलग समस्याएं हैं, जिनके कारण, लक्षण और इलाज अलग हो सकते हैं. अब सवाल है कि आखिर, एसिडिटी और गैस्टाइटिस क्या होती है? क्या दोनों के लक्षण एक ही होते हैं? एसिडिटी और गैस्टाइटिस में फर्क क्या है? आइए जानते हैं इस बारे में-
एसिडिटी क्या होती है? what is Acidity
हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स तब होता है जब पेट का एसिड ऊपर खाने की नली (इसोफेगस) में वापस आने लगता है. इससे सीने में जलन महसूस होती है, जो अक्सर खाने के बाद या लेटने पर बढ़ सकती है.
गैस्ट्राइटिस क्या होता है? what is Gastritis
रिपोर्ट के मुताबिक, गैस्ट्राइटिस पेट की अंदरूनी परत में सूजन या जलन की समस्या है. इसका मुख्य कारण H. pylori इंफेक्शन, दर्द की कुछ दवाओं (NSAIDs) का ज्यादा इस्तेमाल, अल्कोहल का सेवन या स्ट्रेस भी हो सकता है.
एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस के लक्षण क्या? Gastritis and Acidity symptoms
एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस के लक्षणों में भी थोड़ा फर्क होता है. गैस्ट्राइटिस में मतली, उल्टी, भूख कम लगना और थोड़ी मात्रा में खाने के बाद भी पेट भरा-भरा महसूस हो सकता है. गंभीर मामलों में उल्टी में खून, काले रंग का मल जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. दूसरी ओर, एसिडिटी में मुख्य रूप से सीने में जलन और खट्टा पानी मुंह तक आने जैसी समस्या होती है.
एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस के इलाज में अंतर? Gastritis and Acidity difference
एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस का इलाज भी अलग होता है. एसिडिटी में एंटासिड दवाएं और मसालेदार खाना कम करने की सलाह दी जाती है. जबकि गैस्ट्राइटिस में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स, एसिड कम करने वाली दवाएं और पेट को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से बचने की सलाह देते हैं. अगर ये लक्षण कई दिनों तक बने रहें, तो सही जांच और इलाज के लिए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है.