Erectile Dysfunction and Diabetes Connection: कई पुरुषों के लिए Erectile Dysfunction (ED) यानी इरेक्शन हासिल करने या बनाए रखने में परेशानी सिर्फ सेक्सुअल हेल्थ से जुड़ी समस्या लग सकती है. लेकिन, अगर यह परेशानी बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करना बिलकुल ठीक नहीं है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, लगातार होने वाला ED कभी-कभी शरीर में ब्लड फ्लो, नसों और मेटाबॉलिक हेल्थ से जुड़ी गड़बड़ियों की ओर भी इशारा कर सकता है. खासतौर पर डायबिटीज और हार्ट से जुड़ी बीमारियों के साथ संबंध देखा गया है. हालांकि, कभी-कभार होने वाली परेशानी का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कोई गंभीर बीमारी है. अब सवाल है कि आखिर, डायबिटीज से क्या है ED का कनेक्शन? क्या हार्ट हेल्थ से भी जुड़ सकता है ED? आइए जानते हैं इससे जुड़ी जानकारी-
डायबिटीज से क्या है ED का कनेक्शन?
एस्टर एस्टर व्हाइटफील्ड हॉस्पिटल के लीड कंसल्टेंट एवं एचओडी यूरोलॉजी, डॉ. गोकुलकृष्णन पी.जे. (Dr. Gokulakrishnan PJ) के अनुसार, डायबिटीज और Erectile Dysfunction (ED) के बीच बीच खास कनेक्शन है. लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से शरीर की नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. यही नसें और रक्त वाहिकाएं सामान्य यौन क्रिया के लिए जरूरी होती हैं.
अमेरिकी CDC के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित पुरुषों में डायबिटीज न होने वाले पुरुषों की तुलना में ED होने की संभावना करीब तीन गुना अधिक होती है.
क्या हार्ट हेल्थ से भी जुड़ सकता ED
इरेक्शन के लिए पर्याप्त ब्लड फ्लो का होना बहुत जरूरी है. पेनिस की रक्त वाहिकाएं कोरोनरी धमनियों की तुलना में छोटी होती हैं. ऐसे में शरीर में ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्या कभी-कभी यौन स्वास्थ्य में पहले नजर आ सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार ED होना हार्ट डिजीज का संकेत है. तनाव, कुछ दवाएं, हार्मोनल बदलाव और अन्य शारीरिक या मानसिक कारण भी Erectile Dysfunction की वजह बन सकते हैं.
किन पुरुषों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?
अगर ED बार-बार हो रहा है और साथ में हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, डायबिटीज, स्मोकिंग या परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है. Dr. Gokulakrishnan के मुताबिक, ऐसी स्थिति में डॉक्टर केवल यौन समस्या पर ध्यान देने के बजाय ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज, लिपिड प्रोफाइल, वजन और दूसरे कार्डियोवैस्कुलर रिस्क फैक्टर्स की भी जांच कर सकते हैं.
मेटाबॉलिक हेल्थ भी डालती है असर
मदरहुड फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की कंसल्टेंट डॉ. प्रियंका रेड्डी के अनुसार, पुरुषों की सेक्सुअल हेल्थ का कनेक्शन ओवरऑल हेल्थ से भी है. इंसुलिन रेजिस्टेंस, प्रीडायबिटीज और डायबिटीज जैसी स्थितियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती हैं. लगातार हाई ब्लड शुगर छोटी रक्त वाहिकाओं और नसों को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा, खराब नींद, लंबे समय तक बैठे रहना, कम शारीरिक गतिविधि, असंतुलित खान-पान और क्रोनिक स्ट्रेस भी मेटाबॉलिक हेल्थ और सेक्सुअल फंक्शन को प्रभावित कर सकते हैं.
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर यौन समस्या लगातार या बार-बार हो रही है, तो इसे केवल सेक्सुअल या मानसिक समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए. डॉक्टर से जांच कराने पर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों का पता लगाने में मदद मिल सकती है. नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद, वजन को नियंत्रित रखना, स्मोकिंग छोड़ना और ब्लड शुगर व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना सेक्सुअल और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है.