Bone Health: अगर आपको लगता है कि घुटनों का दर्द, कमर दर्द और जोड़ों की समस्या सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी है, तो अब अपनी सोच बदलने का समय आ गया है. आजकल बड़ी संख्या में 30-40 साल के युवा भी हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बन रही है घंटों कुर्सी पर बैठे रहना, मोबाइल-लैपटॉप का बढ़ता इस्तेमाल, शारीरिक गतिविधि की कमी और खराब लाइफस्टाइल. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कम उम्र में ही हड्डियां कमजोर क्यों होने लगी हैं? क्या लंबे समय तक बैठना रीढ़ और घुटनों को नुकसान पहुंचा सकता है? किन आसान आदतों को अपनाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है? इन्हीं अहम सवालों के जवाब दे रही हैं एलएनजेपी हॉस्पिटल नई दिल्ली की सीनियर पेन कंसल्टेंट डॉ. भुवना आहुजा-
30 में ही क्यों बढ़ रहा घुटनों का दर्द?
डॉ. भुवना आहुजा कहती हैं कि, आजकल घुटनों का दर्द केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है. कम उम्र के युवा भी इसके शिकार हो रहे हैं. 30 की उम्र में इसकी सबसे बड़ी वजह लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि कम होना और मांसपेशियों का कमजोर पड़ना है. इसके अलावा बढ़ता वजन, पुराने खेल या सड़क दुर्घटना से जुड़े चोट के निशान, गलत पोस्चर और बार-बार एक ही तरह का काम करने से भी घुटनों पर लगातार दबाव पड़ता है.
डॉक्टर कहती हैं कि, घुटनों के आसपास की मांसपेशियां जितनी मजबूत होंगी, जोड़ों पर उतना कम दबाव पड़ेगा. लेकिन, जब शरीर सक्रिय नहीं रहता, तो मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और इसका सीधा असर घुटनों पर दिखाई देता है.
घंटों बैठना रीढ़ और घुटनों के लिए कितना खतरनाक?
आज की नौकरी और जीवनशैली में कई लोग 8 से 10 घंटे तक लगातार कुर्सी पर बैठे रहते हैं. डॉक्टर के मुताबिक, यह आदत रीढ़, कूल्हों और घुटनों पर धीरे-धीरे गंभीर असर डालती है. लंबे समय तक बैठने से कमर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है. कूल्हों की मांसपेशियां अकड़ने लगती हैं और घुटनों तक खून का संचार भी कम हो सकता है. नतीजतन शरीर में जकड़न, दर्द और समय के साथ जोड़ों के घिसने की प्रक्रिया तेज हो सकती है.
डॉक्टर की सलाह है कि, लगातार 35-40 मिनट से अधिक एक जगह बैठने से बचें. इसके बजाय 20-8-2 नियम अपनाएं. यानी 20 मिनट बैठें, 8 मिनट खड़े रहें और 2 मिनट जरूर चलें. यह छोटी-सी आदत आपकी रीढ़ और जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम कर सकती है.
कब समझें कि जोड़ों का दर्द सामान्य नहीं है?
हर दर्द को नजरअंदाज करना सही नहीं है. अगर जोड़ों में तेज दर्द हो, सूजन आ जाए, लालिमा दिखाई दे, जोड़ गर्म महसूस हो, चलने-फिरने में दिक्कत हो या दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो इसे सामान्य समस्या मानकर घर पर इलाज करने की बजाय ऑर्थोपेडिक से जांच करानी चाहिए. इसके अलावा अगर आराम करने के बाद भी दर्द बार-बार लौट रहा हो, तो यह किसी गंभीर बीमारी या शुरुआती जॉइंट डैमेज का संकेत हो सकता है.
ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए क्या करें?
ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का कमजोर होना ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे भुरभुरी होने लगती हैं. इससे बचाव इलाज से ज्यादा आसान है. इसके लिए रोजाना कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर भोजन लें. दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं. साथ ही वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और नियमित पैदल चलना हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है. धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन हड्डियों को कमजोर कर सकता है, इसलिए इनसे दूरी बनाना भी जरूरी है.
हड्डियों और जोड़ों को हेल्दी रखने के लिए रोज बदलें ये आदतें
डॉ. भुवना कहती हैं कि, अच्छी हड्डियों और स्वस्थ जोड़ों का कोई शॉर्टकट नहीं है. इसके लिए रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें सबसे ज्यादा मायने रखती हैं. दिनभर में नियमित रूप से शरीर को सक्रिय रखें. सही पोस्चर में बैठें और खड़े हों. भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-डी शामिल करें. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, रोज हल्की स्ट्रेचिंग करें और काम के बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट जरूर टहलें.
जो लोग लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं, उन्हें अपने ऑफिस की एर्गोनॉमिक्स पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि गर्दन, कमर और घुटनों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े.